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आवाज़ कहाँ से आई ?

शाम का समय था I अँधेरा हो चुका था I काजू घर वापस लौट रही थी।  रास्ते में वह बाज़ार से गुज़री। वह बहुत शोर में से शांत जगह में आ गयी।  

टेप…. टेप…. टेप….  आवाज़ आई। 

काजू खड़ी रह गयी।  आसपास देखने लगी। कोई न था। काजू फिर से चलने लगी।  

टेप…. टेप…. टेप….  फिर से आवाज़ आई। 

फिर से काजू खड़ी रह गयी। फिर से आसपास देखने लगी।फिर भी कोई न था। काजू फिर से चलने लगी। 

जैसे ही काजू चलना शुरू करती, आवाज़ आती. और जैसे ही चलना बंद करती, आवाज़ भी बंद हो जाती।  

काजू को कुछ समझ में नही आ रहा था। वह फिर से खड़ी रह गयी और इंतजार करने लगी की अभी आवाज़ आएगी। लेकिन कोई आवाज़ नही आई।  

काजू थोड़ी सी डर गयी और तेज़ी से चलने लगी। आवाज़ भी तेजी से आने लगी।  

काजू तेज़ी से चलती तो आवाज़ भी तेजी से आती। टेप – टेप – टेप

धीरे धीरे चलती तो आवाज़ भी धीरे धीरे आती। टेप…. टेप…. टेप…

कुछ देर तक ऐसे ही चला।  फिर अचानक से काजू का ध्यान उसे जूतों पर गया।  

वह सब भूल कर जोर जोर से हसने लगी।  उसे समझ में आ गया था की वह आवाज़ उसके जूतों की थी, उसकी चलने की आवाज़ थी। 

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Written by S Shah

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