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मगरमच्छ के हमले में किसान जख्मी, लोगो में दहशत

खेत में कार्य करने के दौरान मगरमच्छ ने किसान पर किया हमला

पीएचसी में प्रखंड प्रमुख ने इलाज के लिए कराया भर्ती, रेफर

बगहा/पिपरासी से रवीश मिश्र की रिपोर्ट

पिपरासी पंचायत के परसौनी गांव निवासी एक मजदूर अपने खेत में काम कर रहा था । उसी दौरान बगल के नाले से निकल कर एक मगरमच्छ हमला बोलकर बुरी तरह घायल कर दिया है । घटना सोमवार 10:00 बजे की बताई जा रही है । प्रखंड प्रमुख यशवंत नारायण यादव ने परसौनी गांव निवासी पीड़ित इंद्रासन कुशवाहा को पीएचसी  पिपरासी में इलाज के लिए भर्ती कराया । चिकित्सक रविंद्र कुमार मिश्रा के द्वारा प्राथमिक उपचार किया गया । जिसमें पाया गया कि उसकी हाथ की हड्डी मगरमच्छ ने तोड़ दिया है । बेहतर इलाज के लिए रेफर किया जा रहा है । प्रमुख श्री यादव ने रेंजर को इसकी सूचना दी है । और बताया कि इसी गांव निवासी सतनारायण कुशवाहा और विंध्याचल कुशवाहा को भी मगरमच्छ ने हमला बोल कर घायल कर दिया था । आवेदन वन विभाग को भेजी गई  । 3 साल  बीत जाने के बाद भी उन गरीब परिवार को एक फूटी कौड़ी भी वन विभाग के द्वारा उपलब्ध नहीं कराई गई है । यह खेद का विषय है । तत्कालीन बीडीओ  रघुवर प्रसाद ने भी इसकी सूचना जिला पदाधिकारी को भेजी गई थी ।  बताते चलें कि पीपी तटबंध के बगल में एक नाले में करीब तीन दर्जन मगरमच्छ अपने परिवार के साथ निवास करते हैं ।  और उसे वन विभाग पकड़ने में नाकाम रहा । जिसके कारण मगरमच्छ cके आतंक से ग्रामीण भयभीत हैं । करीब  दर्जन भर लोग मगरमच्छ के आतंक से परसौनी गांव छोड़कर इधर उधर पलायन कर गए ।  इन गरीबों को इंदिरा आवास भी मुहैया कराई गई है । मगरमच्छ के भय के कारण यह लोग रात को यहां नहीं रहते हैं । दिन में आते हैं अपनी खेती बारी करते हैं । रात को इधर उधर चले जाते हैं । मगरमच्छ ने  करीब 15 दिन पहले पीपी तटबंध में सुराख कर 27 अंडे दिए थे ।  जिसकी निरीक्षण के लिए जल संसाधन की टीम पटना से यहां गत दिनों पहुंची थी । और अंडे को वन विभाग के विशेषज्ञ के द्वारा वहां से बरामद कर जंगल में सुरक्षित स्थान पर रख दिया गया था । तटबंध में किए गए सुराख  को मिट्टी से भरी गई ।‌और उसके ऊपर जिओ बैग से पैकिंग किया गया।  जिसका निरीक्षण गोपालगंज के मुख्य अभियंता प्रकाश दास के द्वारा रविवार को ही किया गया है । मामले में रेंजर मनोज कुमार ने बताया कि प्रमुख के द्वारा सूचना मिली है ।  आवेदन वन विभाग को अगर पीड़ित परिवार मुहैया कराता है ।  तो उसे विभाग के द्वारा मुआवजा दी जाएगी ।

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