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यह नीतियां करेंगी पृथ्वी को जलवायु परिवर्तन से मुक़ाबले को तैयार

ठीक उस वक़्त, जब दुनिया भर के जलवायु नीति निर्माता, वैश्विक जलवायु और पर्यावरण की दशा और दिशा बदलने वाली IPCC वर्किंग ग्रुप की रिपोर्ट का उसके रिलीज़ होने से पहले अवलोकन कर रहे हैं, तब नेचर क्लाइमेट चेंज में प्रकाशित एक नए पेपर में ऐसी नीतियों की पहचान की गई है जो वैश्विक जलवायु में सुधार और सस्टेनेबल डेवलपमेंट, दोनों उद्देश्यों को संबोधित कर सकती हैं।

यह पेपर दिखाता है कि हम अन्य सामाजिक मुद्दों को संबोधित करने के साथ जलवायु परिवर्तन का मुक़ाबला करने की दिशा में कैसे काम कर सकते हैं। साथ ही, यह पेपर उन प्रमुख नीतिगत क्षेत्रों की पहचान करता है जहां सरकार द्वारा चुने गए विकल्पों से लोगों और पूरी पृथ्वी के लिए कई लाभ हो सकते हैं।

इस पेपर को पॉट्सडैम इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट इम्पैक्ट रिसर्च (PIK), पॉट्सडैम यूनिवर्सिटी और जर्मन डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने लिखा है।

अपने अध्ययन के बारे में बताते हुए, इसके सह-लेखक, एल्मार क्रीगलर कहते हैं, “जलवायु परिवर्तन के बारे में एक ‘साइलो मेंटैलिटी’ (कुँए के मेंढक वाली), जो उसे एक अलग-थलग मुद्दे के रूप में देखती है, हमें नाकामयाब कर देगी। हमें व्यापक सस्टेनेबिलिटी रणनीति के साथ जलवायु संरक्षण को संयोजित करने की आवश्यकता है। इसका मतलब यह हुआ कि हमें नीतिगत उपायों का मिश्रण करना होगा, जिसमें कार्बन प्राइसिंग एक महत्वपूर्ण बिंदु होगा। साथ ही, इसमें स्वस्थ और सस्टेनेबल आहार को बढ़ावा देने और हमारी ऊर्जा की मांग को कम करने के लिए नीतियां और उपाय भी शामिल हैं। हमारा विश्लेषण एक अधिक सस्टेनेबल भविष्य की दिशा में एक संभावित मार्ग प्रस्तुत करता है और दिखाता है कि मानव कल्याण बिना पृथ्वी को नुकसान पहुंचाए भी किया जा सकता है।”

रिसर्च पेपर की क्या है कहानी?

इस पेपर की मुख्य बातें कुछ इस प्रकार हैं

·         जलवायु और सस्टेनेबल डेवलपमेंट नीतियां महत्वपूर्ण हैं, लेकिन नीतियों के केवल एक सेट पर ध्यान केंद्रित करने से अड़चनें और समझौते करने के लिए मजबूरियां आ सकती हैं, जो हमारी प्रगति को धीमा कर देंगी।

·         यह पेपर सस्टेनेबल डेवलपमेंट पाथवे बनाकर, जिसका उद्देश्य उन नीतियों की पहचान करना है जो जलवायु और सस्टेनेबल विकास दोनों के लिए अच्छी हैं, इस अंतर को संबोधित करता है।

·         नीतिगत विचारों के उदाहरण:

o   कार्बन प्राइसिंग रेवेन्यु का रीडिस्ट्रीब्यूशन: ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की प्राइसिंग और कम आय वाले देशों में सस्टेनेबल विकास नीतियों का समर्थन करने के लिए औद्योगिक देशों के राजस्व के कुछ हिस्से का उपयोग करना। यह ऊर्जा-गहन उद्योगों और जीवन शैली, दोनों से दूर हटने के संक्रमण  करने में मदद करेगा, साथ ही साथ एक फंडिंग पाइपलाइन का निर्माण करेगा जो ग्लोबल साउथ (वैश्विक दक्षिण) में गरीबी को दूर कर सके।

o   आहार और कृषि: अकेले अपने दम पर, कुछ जलवायु नीतियां वैश्विक खाद्य कीमतों में वृद्धि कर सकती हैं – उदाहरण के लिए, इस बात के बहुत सारे सबूत हैं कि बायोएनर्जी की बढ़ती मांग कृषि भूमि की मांग को बढ़ाकर खाद्य क़ीमतों को बढ़ाती है। लेकिन कीमतों में यह बढ़ोतरी तब नहीं होती जब आप जलवायु सुरक्षा नीतियों को अन्य जीवन शैली को बदलने में मदद करने वाली लक्षित नीतियों के साथ जोड़ते हैं। उदाहरण के लिए, कम पशु प्रोटीन के प्रति हमारी आहार संबंधी आदतों में बदलाव न केवल स्वास्थ्यवर्धक है, बल्कि यह अधिक जलवायु अनुकूल भी है। यह हमारे पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा करने में भी मदद करता है क्योंकि पौधे पर आधारित भोजन के उत्पादन के लिए मांस या डेयरी की तुलना में बहुत कम भूमि, पानी और खाद की आवश्यकता होती है।

जलवायु परिवर्तन को कम करने और SDG लक्ष्यों की और प्रगति को बढ़ावा देने के लिए नया पाथवे

आगे बात करें तो एक नए अध्ययन में पाया गया है कि सभी 17 सस्टेनेबल विकास लक्ष्यों (SDGs) में एक साथ सुधार करते हुए जलवायु परिवर्तन का मुक़ाबला करने वाला विश्व मुमकिन है। पॉट्सडैम इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट इंपैक्ट रिसर्च (PIK) और जर्मन डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने एक नई एकीकृत रणनीति विकसित की है जो विकास, खाद्य और ऊर्जा पहुंच, वैश्विक और राष्ट्रीय इक्विटी, और पर्यावरणीय सस्टेनबिलिटी के लिए समर्पित नीतियों के साथ महत्वाकांक्षी जलवायु कार्रवाई को जोड़ती है। यह बाधाओं पर नई रोशनी डालता है, लेकिन जलवायु और सस्टेनेबल विकास लक्ष्यों की दिशा में प्रगति को बढ़ावा देने के लिए सहक्रिया (सहयोग)पर भी।

PIK वैज्ञानिक ब्योर्न सोर्जेल, और नेचर क्लाइमेट चेंज में प्रकाशित होने वाले अध्ययन के प्रमुख लेखक कहते हैं, “जलवायु नीतियां महत्वपूर्ण हैं, लेकिन अपने दम पर वे सभी के लिए एक सस्टेनेबल और समृद्ध दुनिया की दिशा में परिवर्तन प्राप्त करने के लिए पर्याप्त नहीं होंगे – एक ऐसा दृष्टिकोण जिसे नीति निर्माताओं ने 2015 में पेरिस समझौते और SDGs को अपनाने के लिए ख़ुद को प्रतिबद्ध किया था। यदि विश्व वर्तमान पथ पर चलता रहा तो  इन 17 SDGs में से एक भी 2030 तक पूरी होगी। और कोविड-19 महामारी से पहले भी यही मामला था, लेकिन अच्छी ख़बर यह है: हमारे पास इसे बदलने के साधन भी हैं।”

पारिस्थितिक सीमाओं के भीतर सभ्य जीवन के लिए नीतिगत हस्तक्षेप

नए अध्ययन में, वैज्ञानिक एक सस्टेनेबल विकास पाथवे (मार्ग) प्रस्तुत करते हैं – एक समर्पित रणनीति जो लोगों को जलवायु परिवर्तन से बचाती है और साथ ही SGDs के लक्ष्यों की ओर बढ़ती है। इसके लिए, वैज्ञानिकों ने कार्रवाई के विभिन्न क्षेत्रों, जैसे भोजन, ऊर्जा या वैश्विक और राष्ट्रीय इक्विटी, और SGDs को हासिल करने की संभावनाओं पर उनके प्रभावों की जांच की। अध्ययन में उपयोग किए गए मॉडल ढांचे का उद्देश्य विशेष रूप से SDGs के व्यापक कवरेज का लक्ष्य है – गरीबी और भूख को बिलकुल हटाने से लेकर जलवायु कार्रवाई और अन्य पर्यावरणीय लक्ष्यों तक पहुंचना – क्योंकि उनमें से कई आपस में मेलजोल रखते हैं और अलग-थलग नहीं देखे जा सकते हैं।

पेरिस समझौते के अनुरूप जलवायु नीतियों के अलावा, इस पाथवे (मार्ग) में स्वस्थ पोषण, अंतर्राष्ट्रीय जलवायु वित्त और एक गरीबों के हित में किये गए कार्बन प्राइसिंग राजस्व के रीडिस्ट्रीब्यूशन जैसे अतिरिक्त उपाय शामिल हैं। “ये 2030 तक SDGs की दिशा में वास्तविक प्रगति करने और 2050 और उसके बाद तक इस ट्रैक पर जारी रहने के लिए कुछ लीवर हैं। यह हमें हमारे ग्रह की पारिस्थितिक सीमाओं का सम्मान करते हुए सभी के लिए एक सभ्य जीवन में सामंजस्य स्थापित करने की अनुमति देते हैं,” सोर्जेल कहते हैं।

स्वस्थ पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा करते हुए स्वस्थ आहार की आपूर्ति

जबकि अकेले जलवायु नीतियां अपने आप खाद्य कीमतों में संभावित रूप से वृद्धि कर सकती हैं – अन्य कारणों के साथ-साथ बायोएनेर्जी की बढ़ती मांग के कारण – जब जलवायु संरक्षण को अन्य लक्षित नीतियों और जीवन शैली में बदलाव के साथ जोड़ा जाता है तब ऐसा मामला नहीं है: “हमारी आहार संबंधी आदतों में कम पशु प्रोटीन की ओर बदलाव, जैसा कि एक विशेषज्ञ आयोग द्वारा ‘प्लेनेटरी हेल्थ’ डाइट (‘ग्रह सेहत’ आहार) में अनुशंसित है, का दूरगामी सकारात्मक प्रभाव साबित होता है,” PIK वैज्ञानिक और सह-लेखक इसाबेल वेइंडल समझाती हैं। ” ‘प्लेनेटरी हेल्थ’ डाइट पौष्टिक रूप से संतुलित होता है और इसमें केवल मामूली मात्रा में पशु-स्रोत भोजन होता है, और इस वजह से औद्योगिक देशों में औसत दर्जे के आहार की तुलना में अधिक स्वस्थ होता है। इसके अलावा, खाद्य उत्पादन के लिए बहुत कम भूमि, पानी और खाद की आवश्यकता होगी, और मांस या डेयरी के उच्च हिस्से वाले आहार की तुलना में कम ग्रीनहाउस गैसें उत्पन्न होंगी। इस प्रकार अपनी आहार संबंधी आदतों को बदलने से जलवायु और हमारे पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा करने में मदद मिलती है।”

जलवायु नीतियों को वैश्विक गरीबों को कैसे लाभान्वित करें

इसी तरह, उच्च आय वाले देशों में ऊर्जा-गहन जीवन शैली से दूर एक संक्रमण कम आय वाले देशों में सभ्य जीवन स्तर और बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए आवश्यक ऊर्जा खपत में वृद्धि को संतुलित करेगा। एक अन्य हस्तक्षेप क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय जलवायु वित्त और और गरीबों के हित में किये गए कार्बन प्राइसिंग राजस्व के रीडिस्ट्रीब्यूशन के रूप में वैश्विक इक्विटी और गरीबी निवारण शामिल है: “हमने पाया कि जलवायु नीतियां ग्लोबल साउथ में गरीबी को भी कम कर सकती हैं। हमारे विश्लेषण से पता चलता है कि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की प्राइसिंग, और कम आय वाले देशों में सस्टेनेबल विकास नीतियों का समर्थन करने के लिए औद्योगिक देशों के राजस्व के कुछ हिस्से का उपयोग करने से ग्रह और लोगों दोनों को लाभ होता है,” सोर्जेल बताते हैं।

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Written by Nishant

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