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शमशान या कब्रगाह

मेरी यात्रा का

हर एक यात्रा का

एक ही अंत

शमशान या कब्रगाह

यात्रा रही हो

दुखद या सुखद

सार गर्भित या निस्सार

स्वार्थ सिद्धि में रत

या औरों पे न्यौछार

तुच्छ अहंता से परिपूर्ण

या विनम्र

विनम्रता ओढ़ी हुई

या असल 

हर यात्रा का एक ही अंत

यात्री

विवेकशील या बुद्धिहीन

औरों को उल्लू बनाने की होड़ में

या अच्छा कुछ करने की दौड़ में

राजा या मेहनतकश मजदूर

गाते बजाते या मजबूर

दिमाग से चलते

या चलाते उन्हें दिल

चलचित्रों सी चलती ज़िंदगियाँ

करतब दिखाती कठपुतलियां              

सबकी एक ही मंजिल

कौंध जाता है

बार बार प्रश्न एक

क्या इस यात्रा का औचित्य

क्या है उद्देश्य

क्यूंकि है नहीं

निश्चित उत्तर कहीं

वेदों में या किसी पुराण में

बाइबिल में

गीता में या कुरान में 

व्यर्थ ही हुए

महावीर जैन या

महात्मा बुद्ध के प्रयास

विवेकानंद, मंडेला, लिंकन

या गाँधी के बोल

पीर पैगंबरों के उच्छ्वास

कब्रगाह के लिए

चलती भागती भीड़ 

न जाने कब हो गयी

पाखंड को समर्पित

न जाने क्यों

केवल झूठ

बन गया उसका लिबास

भूले रहें कितना ही हम

शमशान

सही गलत

सब चेष्टाओं को

देता पूर्ण विराम 

                              

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Written by Atul Kumar

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