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क्रांतिकारी आन्दोलन के लिए एक अनछुआ पहलू

आज की परिस्थितियों में श्रमिक वर्ग के शिक्षण और संगठन के साथ ही मजदूर वर्ग के पार्टी को मजदूर वर्ग की आर्थिक गतिविधि को भी संगठित करना होगा। मजदूर वर्ग की पार्टी को प्रकाशन, मिडिया, जन संगठनों यूनियनों आदि के साथ कार्पोरेशनों को भी संगठित करने का प्रयास करना होगा।

आज मैं एक बेहद बचकानी बात कहने की हिम्मत जुटा रहा हूँ। इस बात को बचकानी इसलिए कह रहा हूँ कि बौद्धिक जगत में आजतक किसी ने यह कहा ही नहीं है और दूसरी तरफ इस बात को व्यवहार में उतारने की मेरे पास हिम्मत नहीं है अगर आप का सहयोग मिला तो हिम्मत भी आ सकती है। और इसके अभाव में यह बात शेखचिल्ली की कल्पना से अधिक हैसियत भी नहीं रखती। खैर शेखचिल्ली कहा जाकर खिल्ली उड़वाने का, पागलखाने में इलाज करवाने की मुफ्त सलाह पाने, बौद्धिक जमात के बीच खिल्ली का पात्र बनने का खतरा मोल लेते हुए भी मैं यह बचकानी बात कहने का साहस कर रहा हूँ, क्योंकि यह बात मुझे व्यापक जनता के हित में लगती है। यह आप तय करें कि यह बात शेखचिल्ली का ख्वाब है, खिल्ली का पात्र है या इसमें कुछ विचारने लायक चीज है।

आज विश्व परिस्थितियां बीसवीं सदी के शुरुआत की परिस्थितियों से गुणात्मक रूप से भिन्न हैं। पूंजीपति वर्ग अपनी सत्ता को पहले की अपेक्षा कहीं अधिक सुदृढ़ कर चुका है प्रचार और नियंत्रण तंत्र कहीं अधिक विकसित है और उस पर उसका नियंत्रण भी अधिक तीखा है। पर इसी के साथ उत्पादक वर्ग के पास भी नए अस्त्र शस्त्र भी उपलब्ध हुए हैं। यहाँ मैं उन्हीं अस्त्र शस्त्रों की चर्चा करना चाहता हूँ।

पूंजीपति वर्ग ने पूरी उत्पादन प्रक्रिया को आज छोटे छोटे उत्पादन इकाइयों के रूप में पूरे ग्लोब पर बिखेर दिया है। इसके कारण उसे मजदूरों के आन्दोलन से निपटने में बहुत सहूलियत हो गई है। एक कारखाने की हड़ताल से उसके ऊपर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता बल्कि कुछ कुछ अन्तराल पर होने वाली हड़तालें उसे अपनी वर्कफोर्स की छंटाई का ही मौका प्रदान करती हैं। वह अपने उत्पादन लक्ष्य को अन्य इकाइयों में स्थानांतरित कर हड़तालों को लम्बा खींचने और मजदूरों को थका कर उन पर दबाव बनाने में ज्यादा सक्षम है। इसलिए शांतिपूर्ण हड़तालों का कोई बड़ा प्रभाव नहीं होता और उनकी तबतक कोई सुनवाई नहीं होती जबतक कि कोई अप्रिय घटना न घटित हो जाए, और ऐसा होने पर सत्ता के पास आन्दोलन का दमन करना आसान और दमन का औचित्य प्रदान कर देता है।

आज की परिस्थितियों में श्रमिक वर्ग के शिक्षण और संगठन के साथ ही मजदूर वर्ग के पार्टी को मजदूर वर्ग की आर्थिक गतिविधि को भी संगठित करना होगा। मजदूर वर्ग की पार्टी को प्रकाशन, मिडिया, जन संगठनों यूनियनों आदि के साथ कार्पोरेशनों को भी संगठित करने का प्रयास करना होगा। ये कार्पोरेशन पूरी तरह बाजार के नियमों के तहत ही काम करेंगे पर उनपर पार्टी का नियंत्रण होगा। वेतन सुविधाओं आदि पर सर्वहारा वर्गीय दृष्टिकोण का अनुपालन करते हुए कर्मचारियों को सर्वाधिक बेहतरीन कार्य वातावरण और नौकरी की सुरक्षा उपलब्ध कराते हुए प्रतिस्पर्धी मूल्य पर उत्पादन किया जा सकेगा। निश्चित रूप से इन कार्पोरेशनों में प्रबंधन और कार्यबल के बीच सम्बन्ध समाजवादी आदर्शो के अनुरूप होगा पर व्यावसायिक सम्बन्ध बाजार आधारित ही होंगे और मजदूरों के वैचारिक और सांस्कृतिक रूपांतरण पर ध्यान केन्द्रित करना होगा। कारपोरेशन की पूंजी में मजदूरों की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने और किसी एक व्यक्ति या समूह का पूरा नियंत्रण स्थापित हो जाने से रोकने के उपायों पर ध्यान केन्द्रित करना होगा। ऐसे नियम लागू करने होंगे कि इन कारपोरेशन के नियंत्रक निकाय पर पार्टी का नियंत्रण बना रहे और ये मजदूरों के शोषक निकाय में न बदलने पाएं।

ये कारपोरेशन सदा आम जनता की भागीदारी और नियंत्रण के अधीन काम करेंगे।  ये कारपोरेशन चार लक्ष्यो की पूर्ति करेंगे:
1. बाजार में मजदूर समर्थक कार्यवातावरण को प्रमोट करना।
2. आंदोलनों के दौरान आगे बढ़े हुए मजदूरों के नौकरी गंवाने की स्थिति में वैकल्पिक रोजगार मुहैया कराना।
3. मजदूर आन्दोलन में शामिल लोगों को आर्थिक सुनिश्चितता उपलब्ध कराना।
4. समाजवादी समाज की औद्योगिक सरचना का प्रोटोटाइप उपलब्ध कराना।

इन कार्पोरेशनो के नियम इस प्रकार हो सकते हैं:

  1. कारपोरेशन में कार्य पाने के लिए किसी न किसी जन संगठन में कम से कम एक साल की सक्रियता आवश्यक हो।
  2. कम से कम 10 शेयर खरीदा होना आवश्यक हो।
  3. कारपोरेशन के प्रबंधन निकाय का सदस्य बनने के लिए किसी न किसी जन संगठन में कम से कम 5 साल की सक्रियता व कारपोरेशन की किसी इकाई में कम से कम एक वर्ष का कार्य अनुभव तथा कम से कम 200 शेयर का धारक होना आवश्यक हो।
  4. कोई अगर शेयरों की न्यूनतम संख्या धारण नहीं करता तो वह उस संस्तर की सदस्यता के योग्य नहीं होगा या बाद में शेयरों का हस्तांतरण कर देता है तो अयोग्य हो जाएगा।
  5. कोई अगर किसी भी जन संगठन में सक्रिय सदस्य नहीं रह जाता तो प्रबंधन निकाय की सदस्यता के अयोग्य  हो जाएगा।
  6. किसी भी जन संगठन में जो सदस्य नहीं है उसकी नियुक्ति सिर्फ अनुबंध के आधार पर ही होगी जो किसी न किसी जन संगठन में भागीदारी की शर्त पूरी होने के बाद ही स्थाई हो सकेगी।
  7. किसी के कदाचार का दोषी पाए जाने पर निर्णय का अधिकार प्रबंधन निकाय के सदस्यों को होगा।
  8. कदाचार के दोषी की बर्खास्तगी का निर्णय प्रबंधन निकाय के सदस्यों की सर्वसम्मति से ही होगा।
  9. सर्वसम्मति न होने की स्थिति में बर्खास्तगी की बजाय निलंबन लागू होगा जबतक कि दोषमुक्ति या बर्खास्तगी पर सर्वसम्मति न हो जाय या सामान्य सदस्यों के दो तिहाई मतों द्वारा निर्णय की पुष्टि न हो जाय।
  10. नियमों में किसी बदलाव सिर्फ सभी सदस्यों की सर्वसम्मति से ही होगा। नियमों में किसी बदलाव के विरुद्ध सभी सदस्यों को वीटो अधिकार होगा और उनकी अनुपस्थिति को उनका नकारात्मक मत माना जाएगा।
  11. कारपोरेशन में न्यूनतम और अधिकतम वेतन के बीच अधिकतम अंतर दो गुने का ही होगा।
  12. अनुबंध पर नियुक्त कार्मिक के पास शेयर होने के बावजूद मत का अधिकार नहीं होगा और वेतन अनुबंध के अनुसार होगा, प्रबंधन निकाय को साधारण बहुमत से अनुबंध की शर्तों में संसोधन या अनुबंध के समापन का अधिकार होगा।
  13. किसी एक सदस्य को सिर्फ एक वोट का अधिकार होगा और शेयरों की संख्या के आधार पर अधिक वोट का अधिकार नहीं होगा।

इन उपरोक्त 13 नियमों के माध्यम से कारपोरेशन पर किसी एक व्यक्ति या समूह का नियंत्रण स्थापित होने को रोका जा सकता है। यह एक मोटा मोटी प्रस्तावना है। इसके आधार पर एक सटीक और अंतिम नियमावली का निर्धारण सदस्यों के मंडल द्वारा बनाया और लागू किया जा सकता है।

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