in , ,

भारत की कैद मानसिकता

भारत की कैद मानसिकता

कब तक रहेगी भारत की कैद मानसिकता बरकरार ?

मेरे प्यारे देशवासियों

कब अपनी मानसिकता को बदलोगे,

कब तक फंसे रहोगे बीजेपी और कांग्रेस की राजनीति में ।

सवाल है मेरा एक , क्या सच में हम हैं आज़ाद हुए?

क्योंकि  नहीं लगता मुझे आज़ादी मिली है हमें,

पहले गुलाम थे ब्रिटिश सरकार के

आज अपनी सरकार के गुलाम हैं हम हुए,

वो हमसे लगान वसूलते थे, ये वसूलते हैं कर,

माना जरूरी है कर भी हमारे विकास के लिए

मगर क्या सच में ये कर हमारे लिए  इस्तेमाल हुए?

नहीं!

ये जाते हैं राजनेताओं की रैलियों में,

जोर देते हैं हम मंदिर और मस्जिदों के निर्माण में

क्या शिक्षा और स्वास्थ्य से ये बढ़कर हुए?

नहीं!

मुझे तो लगता नहीं।

जो पूरे बिहार में स्क्रीन लगा की रैली बीजेपी सरकार ने,

आखिर किसके पैसे इसमें खर्च हुए?

जनता के!

प्रधानमंत्री जी की पोशाकों पर जो लाखों है खर्च होते

वो किसकी जेब से हैं जाते?

आम जनता की!

ये राजनीतिक दल आज हिंदू मुस्लिम को भड़का एक दूजे के खिलाफ,

चाहते है करना मुस्लिमों को साफ,

किंतु कल कल को फिर वो दिन भी आयेगा,

जब हिंदू बलशाली बन निम्न वर्ग को भी सतायेगा,

क्योंकि आज भी दलित इसी हाल में हैं,

जिस हाल में मुस्लमान हैं।

कट्टर होना कोई अच्छी बात नहीं,

चाहे वो हिंदू हों या मुस्लिम,

क्योंकि ये कट्टर शब्द ही गलत है, तो इससे जुड़े सब गलत हुए।

बाहरी दुश्मन की अब हमें जरूरत सी नहीं है,

क्योंकि देश के भीतर अपने ही आतंकवादी हैं बने हुए।

और बात करें देश की बेटियों की, जो आज भी बंदिशों में हैं बंधी हुई,

और उनकी आजादी के बिना हम भी क्या आज़ाद हुए?

रोज होते हैं ब्लात्कार और नहीं होते फैसले कानून अनुसार,

ए सरकार तुझे होना चाहिए शर्मसार।

कब तक रहेगी भारत की कैद मानसिकता बरकरार ?

The views and opinions expressed by the writer are personal and do not necessarily reflect the official position of VOM.
This post was created with our nice and easy submission form. Create your post!

What do you think?

Written by Amit Kumar

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Loading…

0

Comments

0 comments