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शिक्षा : क्या हम वाकई सीख रहे हैं !!?

आजकल के शिक्षा के स्तर की बात करें तो यह सिर्फ , प्रोजेक्ट, असाइनमेंट और  एग्जाम में अच्छे नंबर लाने तक ही सिमट कर रह गया है , और यह सब भी अगर विद्यार्थी खुद करे तो कुछ फायदा भी हो पर गूगल गुरु के रहते तो यह भी संभव नहीं है।

शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है जिसका उपयोग आप दुनिया को बदलने के लिए कर सकते हैं ” नेल्सन मंडेला की यह पंक्तियां साफ-साफ बता रही है कि शिक्षा कितनी शक्तिशाली है l पर शिक्षा तो आज हर कोई ले रहा है , इस हिसाब से देखा जाए तो अपराध का दर अब तक खत्म हो जाना चाहिए था या कम तो हो ही जाना चाहिए था।

पर यह तो प्रतिदिन दिवाली के रॉकेट की तरह आसमान छूता जा रहा है , आखिर क्यों ? अब अगर आपको इसका जवाब पता है तो मैं आपको दाद देती हूं और साथ ही आग्रह करती हूं इस क्षेत्र में प्रयास भी करें क्योंकि केवल उत्तर पता होना बड़ाई नहीं हैं बल्कि प्रयास करना भी आवश्यक है , और यदि आपको क्यों का उत्तर नहीं पता तो मैं बता देती हूं – शिक्षा का अर्थ होता है सीखने-सिखाने की क्रिया। जब तक किसी क्रिया से कुछ सीखने को ना मिले उसे शिक्षा नहीं कहा जा सकता है, शिक्षा की तो कोई सीमा नहीं होती हम कुछ भी कहीं भी और कैसी भी सीख सकते हैं, कोई भी राह चलता कुछ सिखा दे तो वह हमारा गुरु बन जाता है , पर बात शिक्षा देने का दावा करने वाले ठेकेदारों की करते हैं यानी स्कूल, कॉलेज और शिक्षकों की है जिनका पेशा ही शिक्षा देना है ।

विक्टर ह्यूगो ने कहा था “वह जो स्कूल के दरवाजे खोलता है जेल के दरवाजे बंद करता है” यह बात सही भी है क्योंकि ज्यादातर अपराध शिक्षा के अभाव में ही होते हैं , पर क्या  स्कूल, कॉलेज खोलना ही संपूर्ण समाधान है? क्या बस स्कूल खोलकर किनारे हो जाओ तो अपराध खत्म हो जाएगा? अगर ऐसा है तो अच्छी शिक्षा हासिल करने के बावजूद क्यों कई छात्र समय-समय पर अपराध जैसे हत्या, लूट, मारपीट जैसी वारदातें अंजाम देते रहते हैं? महानता सिर्फ शिक्षा प्रदान करने में नहीं बल्कि सामने वाले के उसे सही तरह से ग्रहण करने में हैं। आजकल के शिक्षा के स्तर की बात करें तो यह सिर्फ , प्रोजेक्ट, असाइनमेंट और  एग्जाम में अच्छे नंबर लाने तक ही सिमट कर रह गया है , और यह सब भी अगर विद्यार्थी खुद करे तो कुछ फायदा भी हो पर गूगल गुरु के रहते तो यह भी संभव नहीं है।

हालात इतने बुरे हो गए हैं कि लोग अपने व्यक्तिगत जीवन की दिक्कतों का समाधान भी वहीं ढूंढते फिरते हैं , ऐसा ही चलता रहा तो एक दिन खुद के अंदर भी दिमाग है लोग यह भूल जाएंगे । हमें किसी भी प्रकार का काम दिया जाता है तो हमारी स्थिति यह है कि हम सीधे सोच लेते हैं, चलो यार गूगल कर लेंगे। एक बार भी यह नहीं सोचते कि वाह! कुछ सीखने को मिलेगा, मजा आएगा आदि जैसे  खुद से सोचना ही बंद कर दिया है हमने। गूगल करना गलत नहीं है, वह हमारी सहायता के लिए ही बनाया गया है। पर हमेशा उसी पर निर्भर रहना है यह गलत है।

यदि हम पहले की शिक्षा व्यवस्था की बात करें तब जब तकनीक इतनी विकसित नहीं हुई थी , मोबाइल भी नहीं हुआ करते थे क्या उस वक्त के लोग शिक्षित नहीं थे द्रोणाचार्य क्या पांडवों को ऑनलाइन नोट्स भेजा करते थे? , क्या अर्जुन यूट्यूब पर तीर चलाने के हुनर सीखा करते थे? नहीं! बिल्कुल नहीं!, वह जिससे निखरे वह थी उनकी एकाग्रता, कुछ सीखने की ललक, और निरंतर प्रयास, वह एकलव्य जिसे गुरु का सौभाग्य भी प्राप्त नहीं हुआ इतना बड़ा तीरंदाज बन जाता है केवल अपनी बुद्धि और प्रयास के बल पर।

आज हम सब मंजिल पाने के लिए सिर्फ भाग रहे हैं , हमें अपनी दिशा दशा का भी कुछ ख्याल नहीं है,  हमारा उद्देश्य सिर्फ दूसरों से आगे निकल जाने का रह गया है ,दूसरों की नजरों में महान बनने का रह गया है , दोस्तों में अपना नाम बनाने का रह गया है, रिश्तेदारों के सामने इतराने का रह गया है और इसके लिए फिर चाहे हमें 12-12 घंटे रटना पड़े या कहीं से कॉपी करना पड़े हम फर्क नहीं पड़ता क्योंकि हमें तो कुछ सीखना नहीं है बस अच्छे नंबर लाने हैं, टॉप करना है ।

किसी कंपनी के सीईओ से उसी के कंपनी के सारे डिपार्टमेंट में इंटरव्यू देने को कह दिया जाए तो जाने कितने ही डिपार्टमेंट के इंटरव्यू में वह सफल नहीं हो पाएगा , लेकिन वह पूरी कंपनी चला सकता है क्योंकि काबिलियत मायने रखती है कि आप किस काम को करने में कितने सक्षम है ना कि आपके नंबर कितने अच्छे हैं ,फारसी में 90% अंक लाने वाला भी सही ढंग से फारसी नहीं बोल पाता क्योंकि उसने उसे समझा नहीं बल्कि रटा , है वहीं ईरान का कोई पांच साल का बच्चा भी वही फर्राटे से बोल लेता है क्योंकि उसको ऐसा वातावरण मिला है ।

हम सब शिक्षा ले रहे हैं, रोज स्कूल कॉलेज जा रहे हैं, बड़े-बड़े शिक्षा संबंधी कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं, तो कहीं किसी विषय पर घंटों लंबा भाषण दे रहे हैं, पर भागती जिंदगी से कुछ समय निकालकर खुद से एक सवाल जरूर करें कि__“क्या हम वाकई में सीख रहे हैं ? “

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