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ईव टीजिंग: समस्या से डरना नहीं बल्कि साहस के साथ लड़ना है

महिलाओं का एक उच्च प्रतिशत (लगभग 70%) उत्पीड़न का विरोध करता है और विभिन्न तरीकों से इससे निपटता है। जिसमें अपराधी का सामना करना, परिवार और दोस्तों से मदद मांगना और सहायता के लिए बाइ स्टेंडर का आह्वान करना शामिल है।

महिलाएं और लड़कियां काबिलियत से भरी हुई है, बस जरूरत है तो उन्हें उन चार दीवारों से निकाल कर एक सुरक्षित वातावरण और देश देने की। न अधिक की मांग, न ही किसी से कम, बराबर की हिस्सेदारी दे। ऐसा करने से लड़कियों और महिलाओं के साथ साथ देश का भी स्वाभिमान बढ़ेगा।

सच कहते हैं एक सिक्के के दो पहलू होते हैं, एक तरफ भारत की महिलाएं देश विदेश में अपना और देश का परचम लहरा रही हैं तो, इधर भारत में आज भी कुछ रूढ़िवादी धारणा वाले लोग लड़कियों को अभिशाप, बोझ, कुलछनी आदि न जाने क्या क्या कह कर बुलाने से बाज नहीं आते हैं।

यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है, ऐसे रूढ़िवादी धारणा के लोग आज भी किसी न किसी गाँव, तबके और शहर में देखने को मिल जाएगें। सवाल यह नहीं है की ऐसे तबके के लोग कहाँ और कैसे मिलेगें, सवाल यह है की अब इन रूढ़िवादी धारणा वाले लोगों को जागरूक करे या वहाँ की महिलाओं को?

आइए जानें ईव टीजिंग है क्या?

आमतौर पर ईव टीजिंग का अर्थ है महिलाओं के प्रति नकारात्मक व्यवहार करना जिसमें यौन, वर्बल, नॉन वर्बल, शारीरिक रूप से तंग करना सभी शामिल है। कुछ उदाहरणों के तहत जैसे पास आना, अश्लील इशारे करना, सिटी बजाना, घूरना, चुटकी बजाना, गंदी बातें बोलना आदि आमतौर पर रोजाना की जाने वाली हरकतें हैं। जो महिलाओं की मानसिकता पर नकारात्मक प्रभाव डालते है।

ईव टीजिंग पर बढ़ते मुकदमे

आए दिन बढ़ते छेड़खानी (Eve Teasing) के केस महिलाओं को डराने लगे हैं, बेबाक और आवारा लोगों के वजह से लड़कियां देर रात बाहर रहने से घबराती है, घर वालों को अक्सर उनके देर आने पर चिंता सताये रहती है आखिर यह चिंता, यह डर, यह घबराहट क्यों? और खास सवाल यह की यह चिंता और घबराहट सिर्फ महिलाओं और उनके परिवार को ही क्यों?

जिस देश में केवल एक लिंग सुरक्षित नहीं है इसका अर्थ साफ है की उसे कभी मजबूती प्रदान ही नहीं की गयी है,साथ ही उस पर हमेशा से दबाव बना रहा है, या उन्हें शोषित ही समझा जाता रहा है। कहने की आवश्यकता नहीं है सभी ने अनुमान लगा ही लिया होगा की भारत में शोषित, दबाव और कमजोर कौन है? आपने अभी एक बार भी महिलाओं के अलावा किसी और के बारे नहीं सोचा होगा अर्थात आपकी नजर में भी महिलाएं शोषित और कमजोर है। इसके लिए पहले हमें खुद की सोच और नजरिए को बदलने की आवश्यकता है, केवल साल के 10-20 दिन महिला दिवस, नवरात्रि, मदरस डे, रक्षाबंधन आदि पर जोश और लंबे भाषण देने से यह सोच नहीं बदलेगी। बल्कि अपने अंदर से इस बात की गांठ बाँधनी होगी की महिलाएं सक्षम है हर कार्य और परिस्थिति को संभालने के लिए।

महिलाओं का एक उच्च प्रतिशत (लगभग 70%) उत्पीड़न का विरोध करता है और विभिन्न तरीकों से इससे निपटता है। जिसमें अपराधी का सामना करना, परिवार और दोस्तों से मदद मांगना और सहायता के लिए बाइ स्टेंडर का आह्वान करना शामिल है। एक अध्ययन के अनुसार में शहरी नियोजन और सार्वजनिक स्थानों के डिजाइन, सार्वजनिक परिवहन के पोलिसी, पीड़ितों के समर्थन, समस्या की सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाने और कठोर कानूनों से संबंधित नीतियों की सिफारिश की गई है।

यहां कुछ अपराधिक प्रक्रिया संहिता के खंड है जिन्हे हमेशा ध्यान में रखना चाहिए जो आपको न्याय दिलाने में सहायता और सहयोग करेंगे:-

1. धारा 294 – जब भी कोई पुरुष आपके ऊपर गंदे कमेंट पास करे, या सार्वजनिक जगह पर अश्लीलता जैसा व्यवहार करें तो यह सेक्शन 294 का उपयोग कर सकते है, यह अपराध जमानती है, परन्तु सजा अधिकतम तीन महीने की होती है।

2. धारा 354 A,B,C,D – यह धाराएं अपको यौन उत्पीडन से सुरक्षा प्रदान करती है। यदि कोई व्यक्ति आपके साथ आपके बिना मर्जी के यौन सम्बन्ध बनाता है या आपको अश्लील चित्र दिखाता है तो उसने यौन उत्पीडन का अपराध किया है।

3. धारा 509 – यह धारा तब लागू होती है जब कोई पुरुष किसी महिला के स्वाभिमान को ठेस पहुंचाने के लिए अपशब्द का इस्तेमाल करता है।

अतः हमें मिलकर हमारे समाज को जागरुक करना होगा और महिलाओं तथा मासूम बच्चियों के लिए एक स्वस्थ माहौल का निर्माण करना होगा। यह आज के बदलते समाज की एक महत्त्वपूर्ण आवश्यकता है।

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