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रेप के डर से बेख़ौफ़ आज़ाद है रहना मुझे

जिस देश का इतिहास महिला की मर्यादा कलंकित करने वालों के खिलाफ युद्ध छेड़ देने का रहा हो, उनके स्वाभिमान की रक्षा के लिए सर कटाने का रहा हो, आज उसी देश में कायर गिद्धों के किसी समूह द्वारा उनके गौरव को अपमानित किया जा रहा है।

डर…. डर की कई वजह होती हैं जैसे हार का डर, मौत का डर, गिरने का डर तो कभी कुछ खोने का डर। ऐसा ही एक डर देश की हर मां , हर बहन , हर बेटी के दिल और दिमाग़ में है और वह है “ रेप होने का डर ” और यह डर दिन-प्रतिदिन होती घटनाओं से और भी बढ़ता जा रहा है , यह डर कभी निर्भया, कभी आसिफा, कभी प्रियंका रेड्डी तो कभी मनीषा के रूप में सामने आता है।  इन सब में जो बात सामान्य है वह है “महिला” पर सवाल यह है कि हर बार महिला ही क्यों? क्योंकि यह कमजोर वर्ग है इसलिए? मगर ऐसा नहीं है!महिलाओं ने तो देश भी चलाया है, दुष्टों का सर्वनाश भी किया हैै, पर यही महिला आज इतनी कमज़ोर क्यों पड़ गई है?

मैं बताती हूं – वह कहते हैं ना शेर कितना ही अधिक शक्तिशाली क्यों ना हो अगर शिकारियों की तादाद बढ़ जाए तो लड़ना मुश्किल हो जाता है। ठीक वही हो रहा है आज महिलाओं के साथ। समाज जो देवियों को पूजता है उनसे धन, ऐश्वर्य, विद्या और शक्ति की भीख मांगता है। आज उसी ने इन देवियों के सम्मान को कलंकित करने की ठान ली है। जिसे सम्मान देना चाहिए आज उसका तिरस्कार हो रहा है , उसे अपनी हवस का शिकार बनाया जा रहा है। इस संसार को जन्म देने और रहने लायक बनाने वाली इसी महिला का अस्तित्व आज खतरे में है और आश्चर्य की बात यह है कि इसी महिला के कोख से जन्मे प्राणी ही उसे नोच खाने के लिए हर वक्त तैयार बैठे हैं।

जिस देश का इतिहास महिला की मर्यादा कलंकित करने वालों के खिलाफ युद्ध छेड़ देने का रहा हो, उनके स्वाभिमान की रक्षा के लिए सर कटाने का रहा हो, आज उसी देश में कायर गिद्धों के किसी समूह द्वारा उनके गौरव को अपमानित किया जा रहा है , उनकी प्रतिष्ठा को भंग किया जा रहा है , और शर्म की बात यह है कि इतना बड़ा जनसमूह भी आज कुछ नहीं कर पा रहा है। कहते हैं भारत अनेकता में एकता का देश है जहां हर समुदाय एक होकर मिलकर रहते है अगर किसी के भी साथ गलत हो तो सब साथ खड़े होकर लड़ते हैं। फिर बेटियों के खिलाफ हो रहे अन्याय को न्याय दिलाने में आखिर इतनी देर क्यों ?

सिर्फ भीड़ जुटाकर नारे पोस्टर लगाने या दिया मोमबत्ती जलाने से किसी बेटी को न्याय नहीं मिल सकता हमें दोषियों को जलाना है उनका सर्वनाश करना है। हमें एक जानदार क्रांति की आवश्यकता है ,जानदार क्रांति मतलब ऐसी क्रांति जो न्याय मिलने तक एक पल के लिए भी ठंडी ना पड़े यानी हमें न्याय मिलने तक पूरी शक्ति के साथ लड़ना है इसे एक पल के लिए भी कम नहीं होने देना है। जैसे आज़ादी के वक्त हुआ था अगर हम एक बार लड़ कर चुप बैठ जाते तो शायद आज भी हम गुलाम और गुमनाम होते। लेकिन हमने अपनी लड़ाई जारी रखी पूरे तन मन से एकजुट होकर लड़े और अंत में जीते भी।

ठीक उसी प्रकार हमें न्याय के मंदिर के घंटियों को तब तक बजाना है जब तक उसमें बैठे न्याय करने वाले देवता अपनी नींद से ना जाग जाए , कहते हैं हक मांगने से ना मिले तो उसे छीन लेना चाहिए और न्याय हर उस बेटी का हक है जिसके साथ अन्याय हुआ इसलिए हमें न्याय के ठेकेदारों को न्याय के लिए इतना विवश कर देना है कि किसी के भी मन में बलात्कार का ख्याल भी आए तो उसकी आत्मा कांप जाए , हमें उन सभी बेटियों की आवाज को उठाना है जो पुकार रही है – बेख़ौफ़ आज़ाद है रहना मुझे ,  बेख़ौफ़ आजाद है जीना मुझे..

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