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गाँव मेरे तू गाँव ही रह

गाँव मेरे तू गाँव ही रह, शहरों की तू राह ना धर। 

बेशक तरक्की जरूरी है, तू भी बेशुमार तरक्की कर। 

उसूल ही तेरी पहचान है, खुद को उसूलों से दूर ना कर।

गाँव मेरे तू गाँव ही रह, शहरों की तू राह ना धर।

संस्कार तेरी धरोहर है, संस्कारों से तू मुँह ना मोड़। 

रिश्तों में बंधे रहना तेरी संपदा है,रिश्तों के तू डोर ना तोड़।

 गाँव मेरे तू गाँव ही रह, शहरों की तू राह ना धर।

मेहनत तेरी ताकत है, हो उससे दूर खुद को कमजोर ना कर।

अपनी खेतों से तू सबकी भूख मिटाता है, खेतों से तू खुद को अलग ना कर। 

गाँव मेरे तू गाँव ही रह, शहरों की तू राह ना धर।

इमानदारी तेरी शान है, इमानदारी से तू दूर ना हो। 

आत्मीयता तेरी जान है, छोड़ उसे तू खुद को बेज़ान ना कर।

गाँव मेरे तू गाँव ही रह, शहरों की तू राह ना धर।

तू सरल ही अच्छा है, खुद को तू भी जटिल ना बना। 

सुकून तेरा ही सच्चा है, तू भी भागमभाग ना कर। 

गाँव मेरे तू गाँव ही रह, शहरों की तू राह ना धर।

बेशक तरक्की जरूरी है, तू भी बेशुमार तरक्की कर। 

उसूल ही तेरी पहचान है, खुद को उसूलों से दूर ना कर। 

गाँव मेरे तू गाँव ही रह, शहरों की तू राह ना धर।

गाँव मेरे तू गाँव ही रह, शहरों की तू राह ना धर। 

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