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यू कैन फाउंडेशन द्वारा आयोजित लाइव सत्र

कोरोना वायरस से अधिक डरने की जरूरत नहीं है। क्योंकि इसके 80% तक मामले साधारण हैं , केवल 10 से 15% मामलों में हालत गंभीर पाई गई है

आज पूरे विश्व में कोरोना वायरस महामारी के कारण लोगों के अंदर डर पैदा हो चुका है। जिसका एक बड़ा कारण लोगों के पास अधिक जानकारी का होना है। आज सोशल मीडिया पर इस बीमारी को लेकर हद से ज्यादा जानकारी उपलब्ध है। मगर उसमें से कितनी जानकारी ठीक है यह आम जनता के लिए जानना थोड़ा मुश्किल है। कौनसी जानकारी विश्वसनीय है और कौनसी नहीं इस बात को लेकर सभी के मन में संदेह रहता है। इस बीमारी से बचाव के तरीके क्या हैं? कैसे खुद को इस समय में स्वस्थ रखा जा सकता है ?इन्हीं विषयों पर यू कैन फाउंडेशन ने 20 जून 2020 को एक लाइव सत्र (वैबीनार वैल बिंग एंड प्रिकॉशनस इन टाइम्स ऑफ कोविड -19) किया। यह सत्र  4:00 बजे से 5:00 बजे तक चला। यह यू कैन फाउंडेशन का दूसरा लाइव सेमिनार है। इससे पहले भी यह एक ऑनलाइन सेमिनार आयोजित कर चुके हैं।

इस सत्र में मुख्य वक्ता डाॅ. शेख यासिर इस्लाम एमबीबीएस, एमडी एसोसिएट प्रोफेसर मेडिसिन,एलएचएमसी और डॉ. सलोनी सिंह लाइफ कोच, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, माइंडफुलनेस (सचेतन) ट्रेनर ,मास्टर एनएलपी और मोनिस शमशिर ने इस सत्र में एक मध्यस्थ के रूप में भूमिका निभाई। दृष्टि ( इंटर्न ,यू कैन फाउंडेशन) ने सभी का स्वागत करते हुए इस सत्र को शुरू किया और सभी मुख्य वक्ताओं का परिचय दिया। इसके बाद मध्यस्थ मोनिस शमशेर ने इस सत्र कि एहमियत और आज के समय में इसकी आवश्यकता का वर्णन किया । 

यह सत्र एक तरह का प्रश्नोत्तरी सत्र था जिसमें मध्यस्थ ने वक्ताओं से प्रश्न किए और वक्ताओं ने उनके जवाब दिए।

मोनिस शमाशिर ने सबसे पहला प्रश्न डॉ. शेख यासिर से पूछा –

प्रश्न – कोरोना वायरस क्या है और यह कैसे पैदा हुआ?

डाॅ यासिर ने इसके उत्तर में बताया कि आज के समय में लोगों के पास बहुत सारी जानकारी है। मगर उस जानकारी में विश्वसनीय जानकारी बहुत ही कम है। जैसा कि हम जानते हैं कि इस दुनिया में बहुत सारे वायरस और बहुत सारे जीवाणु हैं उनमें से कुछ को हम अपनी आंखों से देख सकते हैं और कुछ को नहीं देख सकते हैं। यह जीवाणु और वायरस खुद के बल पर जीवित नहीं रह सकते हैं।इन्हें जिंदा रहने के लिए किसी दूसरे जीवित प्राणी की आवश्यकता होती है ।इस धरती पर करोड़ों की संख्या में वायरस है औ आज से पहले भी कई वायरस की खोज हो चुकी है। जहां तक बात कोरोना वायरस की की जाए तो सबसे पहले चीन के वुहान शहर में लोगों में निमोनिया फैलना शुरू हुआ लेकिन जब उस बीमारी पर निमोनिया की साधारण वैक्सीन में कोई असर नहीं दिखाया तो खोज की गई कि यह एक अलग वायरस है और इसका नाम नोवल कोरोना वायरस रखा गया ।इससे पहले भी इस तरह के अनेक वायरस थे।

 

प्रश्न – किस तरह वायरल और कोरोना वायरस एक दूसरे से अलग है? इनके फैलने के तरीके कैसे अलग हैं?

डॉ यासिर ने बताया कि वायरस बीमारी फैलाने के लिए जाने जाते हैं और इसकी वजह से बहुत सारी मौतें भी होती हैं जैसे 19वीं सदी में इन्फ्लूएंजा फैला था। इसके बाद डॉ यासिर बताते हैं कि कोरोना वायरस इसलिए खतरनाक है कि अभी तक इसका कोई इलाज नहीं मिल पाया है और ना ही इसका कोई वैक्सीन तैयार हो पाया है। इसके साथ ही मानव शरीर अभी पूरी तरह से इस बीमारी से लड़ने के लिए तैयार नहीं हो पाया है अर्थात अभी मानव शरीर में उतनी इम्यूनिटी नहीं बन पाई है कि वह इस बीमारी से लड़ सके। 

 

प्रश्न – आखिर क्यों इस बीमारी ने पूरे विश्व में इतना हड़कंप मचा रखा है? क्यों लोग इस बीमारी से इतने डरे हुए हैं?

डाॅ यासिर ने बताया की लोगों में इस बीमारी को लेकर डर इसलिए है कि इस बीमारी का पता लगा पाना थोड़ा मुश्किल है। उन्होंने चेचक का उदाहरण देते हुए समझाया कि अगर किसी को यह बीमारी हो जाती है तो हमें अलग से पता लग जाता है कि यह व्यक्ति बीमार है और हमें इससे दूर रहना है। मगर यदि कोई व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित है और संक्रमण काफी हल्के स्तर पर है तो दूसरे व्यक्ति को पता नहीं लग पाता। मगर इसके फैलने का खतरा उतना ही रहता है अर्थात दूसरे व्यक्ति में यह संक्रमण उतनी ही तेजी से फैलता है। इसके साथ ही डॉक्टर यासिर ने बताया की कोरोना वायरस से अधिक डरने की जरूरत नहीं है। क्योंकि इसके 80% तक मामले साधारण हैं , केवल 10 से 15% मामलों में हालत गंभीर पाई गई है और लगभग 2% मामलों में मृत्यु हुई है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि हम इस बीमारी को गंभीरता से ना लें। अगर यह बीमारी एक करोड़ लोगों में फैल गई तो भारत में हमारी स्वास्थ्य सुविधाएं इतनी अधिक नहीं है कि इतनी बड़ी संख्या के लिए अस्पतालों में बेड और इलाज उपलब्ध कराया जा सके। इसलिए आवश्यक है कि हम इस बीमारी को थोड़ा गंभीरता से लें खुद का और अपने आसपास के लोगों का ख्याल रखें। ऐसे में न केवल भारत बल्कि विश्व के अन्य देश में इतनी बड़ी संख्या में मरीजों के इलाज के लिए तैयार नहीं थे। यह संक्रमण इतनी तेजी से फैला कि इतने कम समय में इतनी अधिक अस्पतालों और बेड का इंतजाम करना किसी भी देश के लिए आसान बात नहीं था। इसीलिए भारत में लाॅकडाउन लगाया गया ताकि यह संक्रमण कम फैले और स्वास्थ्य विभाग को इस बीमारी से लड़ने के लिए पर्याप्त इंतजाम करने का समय मिल सके।

प्रश्न – आज कोरोना वायरस के दौर में जितनी जानकारी पूरे विश्व में फैली हुई है इसका मनुष्य के मानसिक स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है?

डाॅ सलोनी इसके उत्तर में बताती हैं कि आज से पहले भी अनेक बीमारियां हुई हैं बहुत सारे वायरस आए हैं लेकिन उस समय सोशल मीडिया इतनी तेजी से इस्तेमाल में नहीं था। मगर आज के समय में सोशल मीडिया एक बड़ी मात्रा में जानकारी का भंडार लिए हुए हैं। लेकिन उसमें से अधिकतम जानकारी प्रमाण आधारित नहीं है। ऐसे में जिम्मेदारी बनती है कि हम किस जानकारी पर विश्वास करें। इसलिए हमें अधिक से अधिक विश्वसनीय वेबसाइट पर ही विश्वास करना चाहिए। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए डॉक्टर सलोनी बताती हैं कि कोरोना वायरस को लेकर या उससे बचने के लिए क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए ऐसी हजारों खबरें सोशल मीडिया पर उपलब्ध हैं। जिन्हें पढ़कर लोग डर जाते हैं। ऐसे समय में यह अत्यंत आवश्यक हो जाता है कि हम कुछ सावधानियां बरतें। इन सावधानियों के बारे में हम शुरुआत से ही जानते हैं। इसलिए हमें अधिक जानकारियों पर ध्यान नहीं देना चाहिए और वही बुनियादी सावधानियां बरतनी चाहिए। 

प्रश्न – आज जब चारों तरफ नकारात्मक विचारों का माहौल बना हुआ है। ऐसे में कोई व्यक्ति खुद को कैसे इन नकारात्मक विचारों से बचा सकता है?

डाॅ सलोनी ने बताया कि जिस तरह हम अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए उस पर ध्यान देते हैं, उसी तरह हमें अपने विचारों और मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों ही महत्वपूर्ण है।

डॉ सलोनी की बात को आगे बढ़ाते हुए डॉ यासिर बताते हैं कि हमें कोरोना वायरस से डर कर अपने मानसिक स्वास्थ्य को नहीं बिगाड़ना चाहिए। यह वायरस कैसे फैलता है इसको लेकर लोगों के मन में ऐसे अनेक विचार आ गए हैं जिससे उनके मन में नकारात्मकता बढ़ गई है। डॉक्टर यासिर बताते हैं कि यह वायरस किसी संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से जो बूंदें या कुछ कण बाहर निकलते हैं उनकी वजह से फैलता है। यह वायरस केवल आंख नाक और मुंह के द्वारा ही अंदर जा सकता है। यदि हमारे हाथ किसी ऐसी वस्तु को छू लेते हैं जहां यह कण गिरे हैं तो, आवश्यक है कि हम अपने आंख नाक और मुंह को कम से कम छुएं। लगातार समय-समय पर अपने हाथों को साबुन या सैनिटाइजर से साफ करते रहें। दूसरा तरीका यह है कि हम ज्यादा से ज्यादा मास्क का प्रयोग करें खासकर तब जब हम बाहर जा रहे हैं। ताकि यदि हम इस वायरस से संक्रमित हैं या कोई दूसरा संक्रमित व्यक्ति हमारे सामने खड़ा है तो इस वायरस के कण मास्क के अंदर ही रह जाए। साथ ही हम इस बात का ख्याल रखें की हम एक दूसरे से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें ताकि इस वायरस से खुद को बचाया जा सके। 

प्रश्न – आज व्यक्ति नकारात्मक विचारों से घिरा हुआ है। ऐसे में खुद को इन विचारों से बचाने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं?

डाॅ सलोनी ने कहा जब भी हमें मानसिक तनाव , नकारात्मक विचार या चिंता महसूस हो तो जरूरी है कि  उस समय हम खुद को सकारात्मक विचारों से घेर ले। साथ ही अपने किसी परिवार वाले या दोस्त से बात करें। इसके साथ ही जरूरी है कि हम रोज अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए योग, सैर ,व्यायाम आदि करते रहें। डॉ सलोनी ने कुछ साधारण तरीके के व्यायाम भी बताएं जिनसे व्यक्ति अपने मानसिक स्वास्थ्य को नियंत्रित रख सकता है।

प्रश्न – यदि कोई व्यक्ति बाहर से कोई सामान खरीद के लाता है तो क्या उन सामान के पैकेटों से भी इस वायरस के फैलने का खतरा है?

डॉ यासिर ने बताया कि यह वायरस केवल आंख , नाक और मुंह के द्वारा हमारे शरीर में प्रवेश करता है। अगर हम ऐसे किसी वस्तु को छू लेते हैं जिस पर इस वायरस के कण मौजूद हैं तो यह तब  वायरस तब तक हमारे शरीर के अंदर नहीं जाएगा जब तक कि हम अपने हाथों से आंख ,नाक और मुंह को नहीं छूते। इसलिए यदि हम लगातार अपने हाथ साफ करते रहें और अपने मुंह को कम से कम छुएं (खासकर बिना धुले हाथों से) तो इस वायरस के फैलने का खतरा अपने आप ही कम हो जाता है। 

प्रश्न – हमें देखने को मिलता है कि जब व्यक्ति मानसिक तनाव में होता है तो उसका असर उसके शारीरिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। क्या मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक स्वास्थ्य आपस में जुड़े हुए हैं?

डॉ सलोनी ने इस प्रश्न का जवाब देते हुए कहा कि बिल्कुल इन दोनों का आपस में बहुत बड़ा संबंध है।जब तक हमारे विचार , भाव नियंत्रित नहीं होंगे ये हमारी रोग प्रतिरोधक शक्ति (इम्यूनिटी) पर बुरा प्रभाव डालेंगे । अगर हम लगातार केवल नकारात्मक ही सोचते रहेंगे तो इससे हमारा मानसिक स्वास्थ्य खराब होगा साथ ही हमारे शारीरिक स्वास्थ्य पर भी इसका ब्यौरा प्रभाव पड़ेगा । इससे बचने का एक ही उपाय है केवल खुश रहना। यदि हम खुद को सकारात्मक विचारों से घर के रखेंगे तो हमारे बीमार होने के आसार बहुत ही कम हो जाते हैं। इसलिए आवश्यक है हम जिस पल में जी रहे हैं उसी पल को खुशनुमा बना कर जिए। हम छोटी छोटी चीजों का आनंद लेना चाहिए । खुद का ख्याल रखना आज के समय में अत्यधिक जरूरी है।

प्रश्न – रोग प्रतिोधक क्षमता आज के समय का सबसे महत्वपूर्ण विषय बन गया है। हम किस प्रकार अपनी इस क्षमता( इम्यूनिटी ) को बढ़ा सकते हैं? क्या इसके लिए दवाइयां लेना जरूरी है या केवल एक अच्छे आहार / भोजन से भी इस क्षमता को बढ़ाया जा सकता है ?

डाॅ यासिर ने बताया कि रोग प्रतिरोधक क्षमता इसी वस्तु नहीं है जो केवल एक रात में बढाई जा सके। इसे बढ़ाने के अलग अलग तरीके हैं । इसके लिए हमारे शरीर में प्रचुर मात्रा में विटामिन , मिनरल और अन्य पोषक तत्वों का होना अति आवश्यक है। इसके लिए यदि हम भरपूर संतुलित भोजन ( balanced diet) का प्रयोग करें तो हमारी इम्यूनिटी अपने आप बढ़ जाएगी। इम्यूनिटी को बढ़ाने के लिए हमें कोई भी दवाइयां खाने की जरूरत नहीं है। खासकर हमें बच्चों के मामले में थोड़ा अधिक ध्यान देना चाहिए कि बच्चा स्कूल में किस तरह का खाना खा रहा है। ऐसे में स्कूल और घर वालो की जिम्मेदारी बनती है कि वह बच्चों को संतुलित खाना उपलब्ध कराएं।

सत्र के अंतिम चरण में मोनिस ने श्रोताओं के कुछ प्रश्नों को वक्ताओं के सामने रखा। 

प्रश्न – आज इस महामारी के दौर में अध्यापकों को ऑनलाइन क्लास लेनी पड़ रही है। इससे उनमें तनाव पैदा हो रहा है । ऐसा क्यों है और इससे कैसे बचा जा सकता है?

डाॅ सलोनी ने बताया कि हम सभी जानते हैं कि इस समय में अध्यापक और बच्चों दोनों के लिए ही ये ऑनलाइन की जाने वाली क्लास मुश्किल होती हैं। ऐसे में आप बच्चों से सीधे तौर पर बात नहीं कर सकते । आप केवल एक स्क्रीन के माध्यम से जुड़े हुए होते हैं। बच्चे भी एक के बाद एक क्लास के दबाव से परेशान हो जाते हैं । ऐसे में जरूरी है कि अध्यापक और बच्चे दोनों ही कुछ देर कम से कम 2-3 मिनट तक शांत रहें । जिससे कि आपके दिमाग को थोड़ी शांति मिले और आपके विचार भी शांत हो सके। 

प्रश्न – इस समय में यदि किसी व्यक्ति को अस्थमा संबंधी समस्या होती है तो क्या उस अस्पताल जाना चाहिए ?

डाॅ यासिर ने कहा इस समय में आप ऑनलाइन अपने डाॅ से सलाह ले सकते हैं। यदि समस्या गंभीर नहीं है तो जहां तक हो सके अस्पताल न जाए।

ऐसे ही श्रोताओं के कुछ अन्य प्रश्नों के उत्तर देते हुए यह सत्र समाप्त किया गया। अंत में मोनिस और दृष्टि ने यू कैन फाउंडेशन की तरफ से सभी श्रोताओं और अपने वक्ताओं का धन्यवाद किया और सत्र को समाप्त किया । 

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