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राजस्थान में राजनैतिक भूचाल व मीडिया का बिगड़ता रूप-एक समीक्षा

पिछले कई दिनों से राजस्थान की सरकार में जो उठापटक चल रही है तथा साथ ही मीडिया के ध्यान का प्रमुख  केंद्र बना हुआ है मानो देश में इसके अलावा मीडिया के पास और कोई मुद्दा ही नहीं है जिसे महत्व दिया जाए ! इसे देखकर मुझे लगा एक युवा होने के नाते मैं भी अपना वक्तव्य आपके समक्ष रखूं !

कहाँ गई हमारी सभी मूलभूत प्रमुख समस्याएँ जैसे —

कोरोना जो विशाल से विशालकाय होता जा रहा है और हमने उसे गौण मान लिया है वर्तमान परिपेक्ष्य में इस बीमारी को देखकर लगता है  मानो तबाही हमारे दरवाज़े पे नाच रही है |

कहाँ गया भारत-चीन की गलवान घाटी का मुद्दा ?

जिस पर पक्ष-विपक्ष पार्टियां इस तरह बहस कर रही थी मानो चीन ने भारत के आधे भौगोलिक क्षेत्र पर कब्ज़ा कर लिया हो |

कहाँ गया युवाओं के रोज़गार का मुद्दा  ?
राजनेता एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं(राजस्थान के परिपेक्ष में) जनप्रतिनिधियों की ख़रीद फ़रोख़्त जैसी दलाली की बातें सामने आ रही है और आज का युवा जो उम्मीद के साथ प्रथम बार मत देता है कहाँ है उसकी उम्मीद ? कहाँ है उसकी भावनाओं की क़ीमत ?

नतीजा यह निकलता है कि ये लोग(राजनेता बंधु) आपस में ही फ्रेंडली मैच खेल रहे हैं और हम लोग आज भी मूकदर्शक बन के देख रहे हैं – आख़िर क्यों? ज़रा सोचिए !

वर्तमान में देखने को मिल रहा है कि कि हुकुमुरान देश की अफ़सरशाही को अपने फ़ायदे के लिए उपयोग कर रहे हैं(SOG राजस्थान पुलिस) प्रशासन पंगु बन चुका है |

न्यायिक प्रक्रिया की बात की जाए तो एक आम आदमी जो सालों से सामान्य मामले में या अपने किसी वाहन को चालान के द्वारा छुडाने के लिए सालों/महीनो न्यायालय में चक्कर काटता रहता है |न्यायालय की व्यस्तता के कारण लाखों बलात्कार पीड़िताओं को न्याय नहीं मिल पाता है | हमारे संविधान में ऐसा कहा लिखा है कि इन हुकुमरानो (राजस्थान विधानसभा सदस्य Anti defection law रिट याचिका) के लिए रात भर अदालतें चलेगी तथा याचिकाओं पर सुनवाई करेंगी ?

बाबासाहब अंबेडकर के संविधान में उसकी प्रस्तावना के अंदर तो यही बताया गया है कि सबको समान अधिकार है सब के साथ एक ही न्यायिक प्रक्रिया का उपयोग किया जाएगा | तो फिर क्यों रात भर अदालतें चलकर इनकी याचिकाओं पर सुनवाई की जाती है और आम आदमी भटकता रहता है?

ज़रा सोचिए कि इन आम लोगों को ख़ास हमने बनाया और आज हम वहीं हैं हमारी ताक़त कोई डाँ CP जोशी (विधानसभा अध्यक्ष)से पूछे जो 1 वोट से चुनाव हार गए थे जरा सोचिए !

आज की परिस्थिति में हमारी मीडिया ने हमारे देश की यह स्थिति कर दी है कि वो जो चाहे वो माहौल इस देश में पैदा कर सकती है तथा करती है | लोकतंत्र के चौथे स्तंभ बताए जाने वाली संस्था के इस रवैये पर मुझे घिन्न आती है……..

राजस्थान की राजनीति में चल रहा है ये घटनाक्रम हमारे(आम आदमी) लिए क्यों ख़ास है ?

इससे देश का क्या फ़ायदा होगा ?

आम आदमी का क्या फ़ायदा होगा ?

क्यों हम इसे रुचिकर विषय बना रहे है इन सब से हम देश तथा युवा पीढ़ी को कई पीछे के दशकों में धकेल रहे हैं | ये सोचने का विषय है कि आख़िर हम ऐसे विषय को क्यों ख़ास बना रहे हैं जो हमारे किसी हित का नही है !

क्या जहाँ चुनाव नहीं होते या MP/MLA नहीं होते (कई संघ शासित प्रदेश तथा राष्ट्रपति शासन दौरान)क्या वहाँ सरकारी तंत्र काम नहीं करता क्या वहाँ की जनता के रोजनर्रा के काम नहीं होते है (इसका ये कदापि मतलब नही है की मेरा लोकतंत्र मे विश्वास नही है) |

अब जो चल रहा है चाहे उसमें सरकार गहलोत बनाए या पायलट बनाए या BJP या अन्य कोई घटक दल बनाए इससे राजस्थान में क्या बदल जाएगा ज़रा सोचिए !

फिर क्यों मीडिया अपनी 95% सतर्कता इसी मुद्दे पर दिखाती है और हम भेड़चाल में इसे देखते जाते हैं और उनकी TRP बढाने मे योगदान देते है|

आख़िर हमें यह सीधा सीधा समझना होगा कि देश को भाजपा या कांग्रेस या अन्य दल या कोई राजनेता नहीं चला रहे हैं ये मीडिया है  |जो जिधर चाहे उधर देश को घुमा रही है और हम मूकदर्शक बनकर देख रहे हैं | लेखक – आज का युवा

Rahul Yadav

LLB,LLM,Researcher

University of Delhi

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