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एएमयू छात्रों द्वारा सीएए विरोधी छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की विच हंटिंग पर प्रेस कॉन्फ्रेंस

सरकार अपनी शक्ति का प्रयोग विद्यार्थियों और युवा नेताओं के खिलाफ कर रही है।सरकार और पुलिस शुरु से ही विद्यार्थियों की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है।

पिछले कुछ हफ्तों में, सीएए का विरोध करने वाले कार्यकर्ताओं और जामिया समन्वय समिति (जेसीसी) के सदस्यों को दिल्ली पुलिस ने  CAA  विरोध के आयोजन में उनकी कथित भूमिका के लिए गिरफ्तार किया है। जो पुलिस के अनुसार, फ़रवरी में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा का कारण बना।हाल ही में गिरफ्तार किए गए लोगों में जामिया मिलिया इस्लामिया के दोन शोधार्थी सफ़ूरा ज़ारगर और मीरान हैदर हैं।ज़ारगर और मीरान की गिरफ्तारी से पहले, उत्तरी-पूर्वी दिल्ली से कई अन्य सीएए विरोधी कार्यकर्ताओं जैसे ख़ालिद सैफ़ी और इशरत जहां को गिरफ्तार किया गया था। इसी तरह अन्य कार्यकर्ताओं जैसे शारजील इमाम, डॉ. कफील खान और साबू अंसारी को CAA विरोधी प्रदर्शनों में उनकी भूमिका के लिए गिरफ्तार किया गया है।

1 जून 2020 को  दोपहर 1:30 बजे एक ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। यह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्रों द्वारा CAA प्रदर्शनकारियों के विच हंटिंग के खिलाफ़ आयोजित की गई।  इस कॉन्फ़्रेंस में एएमयू के विभिन्न केबिनेट सदस्यों , विद्यार्थी नेताओं , एएमयू के छात्र संघ के अध्यक्ष आदि ने छात्रों और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के संदर्भ में अपने अपने पक्ष रखे। यह कॉन्फ़्रेंस लगभग एक घंटे तक चली।

कॉन्फ़्रेंस की शुरुआत मध्यस्थ के रूप में अब्दुल वदूद जो एक छात्र नेता हैं, ने सभी का धन्यवाद करते हुए की। उन्होंने बताया कि आज जब पूरा विश्व महामारी के दौर से गुज़र रहा है उस समय हमारे देश और सरकार की जि़म्मेदारी बनती है कि वह महामारी को प्राथमिकता दें ताकि जो देश में उथल-पुथल मची हुई है उस को क़ाबू किया जा सके लेकिन हमारी सरकार इस महामारी के हालातों को एक ढाल की तरह इस्तेमाल करते हुए उन लोगों पर वार कर रही है जिनका इकलौता जुर्म इतना ही है कि उन्होंने CAA के दुष्परिणामों के बारे में जनता को बताना चाहा।उन्होंने सीएए और एनआरसी के कारण हुए विरोध के बारे में जानकारी देते हुए सम्मेलन की शुरुआत की।उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि इन विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय भाग लेने के लिए कितने निर्दोष मुस्लिम छात्र कार्यकर्ताओं को सलाख़ों के पीछे डाला जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण के वक्तव्य को भी शामिल किया जिसमें उन्होंने बताया कि यह साजि़श चल रही है मुस्लिम विद्यार्थियों और मुस्लिम युवा नेताओं के खि़लाफ़। इसके इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट के वक्तव्य को भी अपनी चर्चा में शामिल किया और कहा कि हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के लिए बयान जारी किया जिसमें उन्होंने कहा कि उनकी जो जांच रिपोर्ट है वह पूर्णतः एकतरफ़ा लग रही है जिसमें केवल मुस्लिम समुदाय को ही टारगेट किया जा रहा है।

सम्मेलन को आगे बढ़ाते हुए सबसे पहले एएमयू के कोर्ट मेंबर मोहम्मद ग़यासुद्दीन अपने विचार सामने रखते हैं। वह बताते हैं कि किस तरह सरकार अपनी पूरी शक्ति का प्रयोग मुस्लिम विद्यार्थियों और मुस्लिम युवा नेताओं के खिलाफ कर रही है । सरकार और पुलिस शुरुआत से ही विद्यार्थियों की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। यह सिलसिला 15 दिसंबर से शुरू हुआ ,जब विद्यार्थियों को कॉलेजों और हॉस्टलों में जाकर पीटा गया और गिरफ़्तार किया गया उन पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए हथियारों का प्रयोग किया गया ।अगर कुछ नहीं किया गया तो वह था कि कार्यकर्ताओं या विद्यार्थियों की बातों को नहीं सुना गया उन्हें अपना पक्ष रखने का मौक़ा ही नहीं दिया गया। विद्यार्थियों पर ऐसे इल्ज़ाम लगाए गए जिनका कोई आधार ही नहीं था। उसके बावजूद भी मुस्लिम समुदाय और अल्पसंख्यक समुदायों ने बड़ी ही शांति से काम किया। उन्होंने सरकार के आदेशों का पालन करते हुए अपने विरोध को शांत किया और लॉकडॉउन का पालन किया। अगर वह चाहते तो यूएस की तरह सड़कों पर निकल कर विरोध प्रदर्शन कर सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। अपनी बात को अंतिम मोड़ देते हुए मोहम्मद ग़यासुद्दीन कहते हैं कि हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम विद्रोह करने की बजाय शांति से आम जनता को इस बारे में जागरूक करें की आखि़र उन मुस्लिम कार्यकर्ताओं का मक़सद क्या था। ताकि जनता को पता लगे की वह देशद्रोही नहीं है बल्कि अपने हक़ के लिए आवाज़ उठाने वाले कार्यकर्ता हैं । ऐसे में हम सड़क पर ना निकल कर इसी तरह की ऑनलाइन कॉन्फ़्रेंस या चर्चाओं के माध्यम से अपने विषय को आगे बढ़ाएं।

इस चर्चा को आगे बढ़ाते हुए एएमयू के छात्र नेता ताहिर आज़मी अपने विचार रखते हैं कि किस तरह सरकार पुलिस के माध्यम से इन मुस्लिम विद्यार्थियों को सामान्य  जनता से अलग कर रहे हैं। ताकि वह जनता के बीच में रहकर उनसे मिल ना सके । उनके साथ अपने विचार साझा ना कर सके और सरकार तथा CAA के विरोध में ना बोल सके। ताहिर आज़मी बताते हैं कि आज इस समय में जब यूएस में एक ब्लैक आदमी की मौत पर लोगों ने सड़क पर प्रदर्शन किया और सरकार के विरुद्ध नारेबाज़ी की। ऐसे में हम कब तक केवल ऑनलाइन इन सब चीजों का विरोध करते रहेंगे । यदि जल्द से जल्द उन मुस्लिम कार्यकर्ताओं के हित में कोई फै़सले नहीं लिए गए तो हमें भी सड़कों पर उतरना पड़ेगा जैसा कि यूएस में हुआ है। उनका कहना है कि दिल्ली में जो दंगे हुए उनमें जो मुस्लिम समुदाय के लोगों की जान गई वह केवल किसी एक व्यक्ति की जान नहीं गई बल्कि उसके पीछे सैकड़ों लोगों की जान लेने की तैयारी चल रही है। साथ ही उन्होंने बताया कि जितने भी मुस्लिम छात्र या मुस्लिम कार्यकर्ता है पुलिस ने उन सभी को उस समय गिरफ़्तार किया जब वह इस महामारी के समय लोगों की मदद कर रहे थे ना कि उस समय जब वह CAA के विरोध में धरना कर रहे थे। आमिर की गिरफ्तारी इसी तरह का उदाहरण है। इसी के साथ में उन्होंने अपनी बात को खत्म किया।

इसके बाद अब्दुल वदूद ने एएमयू के छात्रसंघ अध्यक्ष सलमान इम्तियाज़ को अपने विचार रखने के लिए आमंत्रित किया। सलमान इम्तियाज़ ने अपनी बात की शुरुआत में बताया कि किस तरह और केवल मुस्लिम विद्यार्थियों को ही निशाना बनाया जा रहा है । साथ ही उन्होंने CAA विरोध में हुए धरने का एक सार रूप पेश किया इसके बाद उन्होंने 13 दिसंबर को प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए एक भाषण के एक वाक्य को सामने रखा जिसने प्रधानमंत्री कहते हैं की हम  प्रदर्शनकारियों को केवल उनके कपड़ों से पहचान सकते हैं। इसके संदर्भ में सलमान इम्तियाज़ कहते हैं कि यहां सीधा सीधा एक समुदाय की वेशभूषा पर टिप्पणी की गई एक तरह से उस समुदाय का चरित्र हनन किया गया। इसके बाद अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए सलमान इम्तियाज़ तबलीग़ी जमात से संबंधित मुद्दे पर चर्चा करते हैं और बताते हैं कि किस तरह तबलीग़ी जमात की आड़ में सरकार अपनी नाकामी को छुपा रही है। सरकार कहती है कि देश में कोरोना वायरस तबलीग़ी जमात के लोग लेकर आए हैं। ऐसे में जब जनवरी में हर एयरपोर्ट पर वायरस की जांच कराने की घोषणा कर दी गई थी तब क्यों तबलीग़ी जमात के लोगों की जांच नहीं की गई। साथ ही वह इस बात पर ज़ोर देते हैं कि इस समय सरकार का ध्यान मुख्यतः कोरोना संक्रमण को कम करने पर होना चाहिए । मगर सरकार इस समय लोगों को ख़ासकर मुस्लिम छात्रों और मुस्लिम युवा नेताओं को गि़रफ्तार कर रही है, इस बात को पूरी तरह से नज़रअंदाज करते हुए कि अगर जेल में उनमें से किसी को यह संक्रमण हो गया तो क्या होगा । जिस समय सरकार को प्रवासी मजदूरों और विद्यार्थियों को कैसे संभालना है इस मुद्दे पर ध्यान देना चाहिए, उनकी पीड़ा को कम करने पर ध्यान देना चाहिए लेकिन सरकार उनके हक उनसे छीन रही है। इस तरह के कामों को अंजाम देकर सरकार राजनीति के वैकल्पिक पहलू को तोड़ने का प्रयास कर रही है । यह मुस्लिम छात्र जनता के समक्ष राजनीति के वैकल्पिक पहलू के रूप में उभर कर आ रहे हैं जो सरकार को मंजूर नहीं है।

इसी के साथ सलमान इम्तियाज़ ने बताया कि किस तरह सरकार एक राष्ट्र का सपना देख रही है जो मुख्यतः हिंदू राष्ट्र है। लेकिन सभी चाहते हैं कि ऐसा ना हो । इसलिए CAA विरोध में सभी ने चाहे वह हिंदू हो सिक्ख समुदाय हो या  मुस्लिम समुदाय के लोग मिलकर इसके खिलाफ आवाज उठाई । इस समय सरकार को देश का नाम बदलने की बजाय मजदूरों की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए । साथ ही उन्होंने गि़रफ्तार हो चुके सभी कार्यकर्ताओं का नाम लेते हुए बताया कि यह सब केवल अपने हक़ की आवाज़ उठा रहे थे । वह सभी सियासत नहीं कर रहे थे , किसी आवाम को उकसा नहीं रहे थे । अगर उन्हें ऐसा करना होता तो जब पूरे देश में लोक डाउन लगाया गया उस समय भी यह लोग जनता को उकसा सकते थे, उन्हें सड़क पर उतार सकते थे और विरोध कर सकते थे । लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया वह सभी लोग केवल जरूरतमंद लोगों की मदद कर रहे थे ।लेकिन बदले में उन्हें गि़रफ्तार करके जेल में डाल दिया जा रहा है जो पूरी तरह से ग़लत है और सरकार कोई चाहिए कि वो जल्द से जल्द उन सभी कार्यकर्ताओं पर लगे बेबुनियाद इल्ज़ाम  हटाए और उन्हें रिहा करें। इन सभी बातों के साथ सलमान इम्तियाज़ ने अपना पक्ष रखा।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दृष्टिकोणों और विचारों का मोड़ देखा गया।जैसा कि कुछ ने कहा कि अब सरकार को अंतिम रूप देने का समय है और दूसरों के लिए सभी मुसलमानों को सरकार से निपटने के लिए खुद को एकजुट करने की आवश्यकता है।

इसके बाद फख़रा खान एएमयू की कैबिनेट सदस्य ने बताया कि सरकार इस समय जनता को मुख्य मुद्दे से भटकाने चाहती है ।कोरोना वायरस की आड़ में अपने विरोधियों को चुप कराना चाहती है। जिस समय सरकार को स्वास्थ्य कर्मियों के लिए PPE और प्रवासी मजदूरों के लिए साधन आदि पर ध्यान देना चाहिए उस समय सरकार CAA और NRC का विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार कर रही है। फखरा खान ने इस बात पर भी जोर दिया कि सरकार इस समय डर रही है कि यह सभी छात्र लॉकडाउन  ख़त्म होने के बाद फिर से विरोध कर सकते हैं। इसलिए उन्हें गिरफ्तार करके जेल में डाला जा रहा है। फख़रा खान ने यह भी कहा कि जितने भी लोगों को गिरफ्तार किया गया है हमें उनके द्वारा कहे गए कथनों को जनता के सामने रखना चाहिए जनता को समझाना चाहिए कि उनके भाषणों का मतलब क्या था और उनके भाषण बिल्कुल सही थे । उनमें कोई भी देशद्रोही या नफरत की भावना नहीं थी। इसके साथ ही फखरा खान ने गिरफ्तार हो चुके छात्रों और कार्यकर्ताओं की रिहाई के लिए कैंपेन चलाने का सुझाव देते हुए अपनी बात को पूरा किया।

अंसब आमिर जो एएमयू के छात्र नेता हैं उन्होंने समझाया की किस तरह ये गिरफ्तारियां केवल मुस्लिम समुदाय के लोगों की ही हो रही हैं। शुरुआत से ही पुलिस , कोर्ट , मंत्रियों और सरकार के लिए यह अल्पसंख्यक समुदाय निशाने पर रहते हैं। इन समुदायों को बार बार किसी भी आधार पर आलोचना और दंड का शिकार होना पड़ता है अंसब ने इसका कारण बताते हुए कहा ‘ ये सभी मुस्लिम छात्र गलत को गलत समझने और उसे गलत कहने की क्षमता रखते हैं ।’ साथ ही उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि हम सभी को एक साथ मिलकर सामने आना होगा जो सरकार को मंजूर नहीं है।

वरदाह बेग एएमयू छात्र नेता कुछ तकनीकी खराबी के कारण अपनी बात नहीं रख सकी। उनके बाद अंत में मोहम्मद फ़ज़ल ने सभी से अपील कि की गिरफ्तार हो चुके हैं केवल उनके लिए ही नहीं बल्कि उनके अलावा और जितने भी छात्र या कार्यकर्ता हैं हमें उन सभी के लिए आगे आना होगा । सरकार को चाहिए कि वह उन सभी कार्यकर्ताओं और छात्रों को जल्द से जल्द रिहा कर दें। केवल एक उद्देश्य की उनके साथ इंसाफ हो और सभी की आवाज़ को एहमियत दी जाए यह सम्मेलन समाप्त हुआ।

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