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समविधान बचाओ मोर्चा ने दलितों के कट्टरपंथीकरण पर प्रकाश डाला, दलित मुस्लिम एकता बनाने के उपाय बताये

सीएए के खिलाफ ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन शुरू होने के एक साल पूरा होने पर बिहार में गया के शांतिबाग में एक दिवसीय सांकेतिक विरोध और उपवास का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम समविधान बचाओ मोर्चा के बैनर तले आयोजित किया गया था, जिसके तहत सीएए का विरोध पिछले साल शुरू हुआ था। श्री ओमायर खान उर्फ ​​टिक्का खान, समविधान बचाओ मोर्चा के संयोजक हैं।

इस अवसर पर ओमायर खान द्वारा दलितों के बढ़ते कट्टरपंथ को लेकर मखदूमपुर के विधायक श्री सतीश कुमार को एक ज्ञापन दिया गया। ज्ञापन में मुस्लिम और दलित समुदाय के बीच एकता को मजबूत करने के लिए नव नियुक्त विधायक के लिए कई उपाय थे।

श्री सतीश कुमार संविधान बचाओ मोर्चा के सह-संयोजक भी हैं और पिछले साल शांतिबाग, गया में आयोजित एंटी-सीएए / एनआरसी विरोध प्रदर्शन में सक्रिय रूप से भाग लिया था।

आप संपूर्ण ज्ञापन/ स्मारपत्र यहाँ पढ़ सकते हैं।

श्री सतीश कुमार बिहार विधान सभा सदस्य (मखदूमपुर) के नाम ज्ञापन

श्री सतीश कुमार

बिहार विधानसभा सदस्य

मख़दूमपुर

दिनांक: 29 दिसंबर, 2020

विषय: दलित मुस्लिम व समान विचारधारा वाले संगठनों कि एकता को मज़बूत करने के लिएआवश्यक सुझाव

आदरणीय महोदय,

संविधान बचाओ मोर्चा की ओर से विधान सभा का सदस्य बनने पर आपको हार्दिक बधाई। आप संविधान बचाओ मोर्चा के सह-संयोजक भी हैं और सीएए एनआरसी एनपीआर के ख़िलाफ़ शांतिबाग़ में आयोजित 84 दिन लंबे विरोध प्रदर्शन को मज़बूत करने के आपके प्रयास सराहनीय हैं। विरोध स्थल पर आपकी उपस्थिति दलित मुस्लिम एकता के प्रतीक के रूप में उभर कर सामने आई।

विदित हो कि आप बिहार अनुसूचित जाती व अनुसूचित जनजाति कल्याण समिति के माननीय सदस्य भी मनोनीत किये गए हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि दलितों को तेज़ी से हिंदुत्व की विचारधारा के साथ लामबंद किया जा रहा है। बाबासाहेब भीम राव अम्बेडकर और कांशीराम की विचारधारा के ख़िलाफ़ दलितों को भ्रमित किया जा रहा है और ब्राह्मणवाद की ओर ढकेला जा रहा है। यह प्रयास पिछले कुछ वर्षों से निरंतर चल रहा है और अब यह ज़मीन पर स्पष्ट दिखाई देने भी लगा है। सीएए एनआरसी एनपीआर संविधान को बचाने की लड़ाई होने के बावजूद भी दलित इलाकों में नहीं लड़ी गई। अधिकांश दलितों को ये कह कर भ्रमित किया जा रहा था कि मुसलमानों को डिटेंशन सेन्टर में भेजे जाने के बाद मुसलमानों की संपत्ति उन्हीं के बीच बांट दी जाएगी।

इस आंदोलन को आगे बढ़ाने और दो हाशिए के समुदायों के बीच एक स्थायी बंधन और भाईचारगी की स्थापना करने के लिए, निम्नलिखित बिंदुओं को पूरा करना महत्वपूर्ण है.

  1. एक स्थायी दलित मुस्लिम समन्वय समिति का गठन किया जाए।
  2. सीएए, एनआरसी, एनपीआर के खिलाफ आंदोलन दोबारा से शुरू होने की स्थिति में आन्दोल दलित और मुस्लिम दोनों क्षेत्रों में एक संयुक्त समिति द्वारा किया जाए।
  3. किसी भी अन्य दलित या मुस्लिम मुद्दे के विरोध में, जहां एक या दोनों समुदायों के संवैधानिक अधिकारों का हनन किया गया हो, वहाँ दलित और मुस्लिम दोनों समुदायों की आबादी वाले क्षेत्रों में प्रदर्षन हो।
  4. दलितों के मन कि शंकाओं को दूर करने के लिए संयुक्त समिति द्वारा दलित इलाकों में ज़मीनी स्तर पर De-Radicalization अभियान चलाया जाए।
  5. मख़दूमपुर के विधायक सतीश कुमार बिहार विधानसभा के पटल से केंद्र सरकार से, नागरिकता संशोधन अधिनियम को रद्द करने और एनआरसी और एनपीआर की योजना को पूर्ण रूप से रोकने की मांग करें।
  6. मख़दूमपुर के विधायक सतीश कुमार द्वारा सीएए, एनआरसी, एनपीआर के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन करने के लिए सलाख़ों के पीछे डाल दिए गए सभी राजनीतिक कैदियों की रिहाई की मांग बिहार विधानसभा के पटल से हो।

सस्नेह

समविधान बचाओ मोर्चा

गया, बिहार

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