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समविधान बचाओ मोर्चा ने कृषि क़ानून और सीएए को निरस्त करने तथा एनआरसी और एनपीआर की योजना को वापस लेने हेतु प्रधानमंत्री को स्मारपत्र भेजा

कार्यक्रम का आयोजन समविधान बचाओ मोर्चा के बैनर तले किया गया था, जिसके तहत सीएए का विरोध पिछले साल शुरू हुआ था।

 

सीएए के खिलाफ ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन शुरू होने के एक साल पूरा होने पर बिहार के गया के शांतिबाग में एक दिवसीय सांकेतिक विरोध और उपवास का आयोजन किया गया। लोगों ने संकल्प लिया कि यदि सरकार NRC और NPR को क्रियान्वित करने की अपनी योजना को आगे बढ़ाती है या CAA को लागू करती है तो यह लड़ाई शांतीबाग से फिर से शुरू होगी। हाल में जारी किसानों के विरोध के प्रकाश में लोगों ने एक दिन का उपवास रखा और प्रदर्शनकारी किसानों को समर्थन दिया।

कार्यक्रम का आयोजन समविधान बचाओ मोर्चा के बैनर तले किया गया था, जिसके तहत सीएए का विरोध पिछले साल शुरू हुआ था। श्री ओमायर खान उर्फ टिक्का खान, समविधान बचाओ मोर्चा के संयोजक हैं।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा गया।

माननीय प्रधानमंत्री भारत सरकार के नाम ज्ञापन

श्री नरेंद्र मोदी

माननीय प्रधानमंत्री

भारत

द्वारा – ज़िलाधिकारी, गया , बिहार

दिनांक: 29 दिसंबर, 2020

विषय: तीनों कृषि क़ानून और सीएए को निरस्त करने तथा एनआरसी और एनपीआर की योजना को वापस लेने हेतु स्मारपत्र

आदरणीय महोदय,

कड़ाके की सर्द रातों और हड्डियाँ जमा देने वाली ठंड का सामना करते हुए देश भर के किसान दिल्ली की सीमा पर डटे हुए हैं और पिछले 34 दिनों से संसद में पारित तीनों कृषि क़ानून के  ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हम सभी जानते हैं कि इस आंदोलन के दौरान दर्जनों किसान शहीद हो चुके हैं। अपने वर्तमान रूप में कृषि कानून, कॉर्पोरेट संस्थाओं को पूरी तरह से लाभान्वित कर रहे हैं और  इस प्रक्रिया में कृषि क़ानून किसानों को विनाश की ओर धकेल देंगे, जिससे कृषि क्षेत्र की कमर टूट जाएगी। यहां हम आपका ध्यान इस ओर आकर्षित कराना चाहते हैं कि कृषि क्षेत्र को मुक्त व्यापार के लिए खोलने की दिशा में यह पहल हमारे देश के समाजवादी सिद्धांत पर सीधा हमला है और इस तरह से यह हमारे संविधान पर हमला है।

यह भी आपके ध्यान में लाना है कि अत्यधिक सांप्रदायिक नागरिकता संशोधन अधिनियम अभी तक निरस्त नहीं किया गया है। कृपया ध्यान दें कि सीएए का पारित होना हमारे देश के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों पर हमला है और इसलिए यह हमारे संविधान पर भी हमला है। हम सीएए, एनआरसी और एनपीआर के ख़िलाफ़ देशव्यापी विरोध का हिस्सा थे, जिनमें से शांति बाग प्रमुखों में से एक था। हमने कोरोना महामारी के ख़तरे से लड़ने के लिए, अपनी नागरिक ज़िम्मेदारी समझते हुए अपने विरोध को स्थगित किया था। हालाँकि, हम यह साफ़ करना चाहते हैं कि यह सिर्फ़ एक अंतराल था और हम महामारी के थमने के बाद अपने विरोध को फिर से शुरू करने का संकल्प लेते हैं, अगर सरकार नागरिकता अधिनियम को निरस्त तथा NRC और NPR की योजना को पूर्ण रूप से नहीं रोकती।

हमारी उपरोक्त शिकायतों के प्रकाश में हम भारत सरकार से निम्नलिखित मांग करना चाहते हैं।

  1. जनवरी 2021 में होने वाले बजट सत्र में नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 को निरस्त करें।
  2. संसद का विशेष सत्र तत्काल बुलाकर निम्नलिखित तीन कृषि कानूनों को निरस्त करें :1. किसानों का उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अधिनियम, 2. 2020 कृषि (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार अधिनियम, 3. 2020 आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम, 2020
  3. एनआरसी और एनपीआर को पूरा करने की योजना को वापस लें और उस की आधिकारिक घोषणा करें।

प्रतिलिपी :

  • महामहिम राष्ट्रपति भारत गणराज्य
  • महामहिम राज्यपाल गया, बिहार
  • माननीय मुख्यमंत्री बिहार
  • माननीय नेता प्रतिपक्ष बिहार

निवेदक

समविधान बचाओ मोर्चा

गया, बिहार

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