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देश के युवाओं के मन की बात : डिजिटल आवाज़ के साथ

भारत का युवा अब बेरोजगारी से बहुत ज्यादा परेशान हो चुका है। विकास की राह देखते देखते वो थक चुका है, अब अगर मीडिया या कोई और उनकी बात सुनने को तैयार नही तो युवा खुद इतनी तेज शोर मचाएगा की बहरे शासन तक भी यह बेरोजगारी की आवाज़ गूँज पड़ेगी।

जब भारतीय मीडिया सुशांत सिंह राजपूत की मौत की गुत्थी सुलझाने में लगा हुआ था, कभी करण जौहर, तो कभी रिया चक्रवर्ती से सवाल पूछे जा रहे थे, जब सब चंगा है का नारा अमेरिका और गुजरात के मैदानों में गूंज रहा था तब भारत का युवा अपने रोजगार के लिए भटक रहा था। कभी रेलवे मंत्री के ट्वीट के नीचे रेलवे एग्जाम की तारीख मांगता , तो कभी मन की बात से बौराये युवा वीडियो डिसलाइक करके ही अपनी बात आगे तक पहुचाना चाह रहे थे। मगर न मीडिया, न ओपोजिशन पार्टी, न कोई मंत्री इनकी बात आगे तक न पहुँचा पाया तो युवाओं ने अपना रास्ता खोजा।

बेशक इस कोरोना काल मे बाहर जाना खतरनाक है मगर युवाओं ने इस डिजिटल क्रांति में अपने लिए रास्ता खोजा। रास्ता वही जिसे डिजिटल इंडिया कहा जाता है ।

रेलवे परीक्षा और एसएससी (स्टाफ सिलेक्शन कमिटी) के अभियर्थियों ने अन्य युवाओं के साथ मिलकर ऑनलाइन विरोध का तरीका निकाला, जिसमे ट्विटर का मुख्य रूप से सहारा लिया गया। पहले 1 सितंबर और फिर 5 सितंबर को छात्रों ने ट्विटर पर #SPEAKUPFORSSCRAILWAYSTUDENTS और #RRBexamdates जैसे हैशटैग ट्रेंड करवा कर अपनी बात लोगों तक पहुँचाई। जिस तरह से 30 अगस्त को प्रधानमंत्री के मन की बात के यूट्यूब वीडियो पर उम्मीद से ज्यादा डिसलाइक देखे गए, यह भनक तो लग चुकी थी कि भारत का युवा अब बेरोजगारी से बहुत ज्यादा परेशान हो चुका है। विकास की राह देखते देखते वो थक चुका है, अब अगर मीडिया या कोई और उनकी बात सुनने को तैयार नही तो युवा खुद इतनी तेज शोर मचाएगा की बहरे शासन तक भी यह बेरोजगारी की आवाज़ गूँज पड़ेगी। और बेशक हुआ भी ऐसा ही। यह डिजिटल शोर ट्विटर पर इस प्रकार ट्रेंड हुआ कि सरकार को युवाओं की बात सुननी पड़ी। फिर पिछले काफी समय से अटके एसएससी सीजीएल 2018 के रिजल्ट और आरआरबी रेलवे के एग्जाम की तारीख का आशवासन दिया गयाा। इसे युवाओं की जीत माना गया क्योंकि जिस युवा की बात न सुनी जा रही थी और ना सुनाई जा रही थी, उस युवा ने ही अपना रास्ता खोजा और अपनी बात लोगो को सुनाई।

जिस देश की जनसंख्या करीब 130 करोड़ हो और उसमें भी 50% से ज्यादा युवा हो, आखिर उस देश मे युवाओं की बात जरूर सुननी चाहिए क्योंकि ये युवा ही देश को आगे बढ़ाएंगे और ये युवा ही देश का आने वाला भविष्य तय करेंगे ।

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