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भारत का अंधकारमय काल : आपातकाल की घोषणा

सत्ता का लालच और शासन की भूख किस तरह एक फलते फूलते देश को तबाह कर सकती है और इंदिरा गांधी ने ऐसा ही किया।

स्वतंत्र भारत के इतिहास में, आपातकाल की स्थिति को तीन बार घोषित किया गया है। पहला उदाहरण 26 अक्टूबर 1962 से 10 जनवरी 1968 के बीच भारत-चीन युद्ध के दौरान हुआ था , जब “भारत की सुरक्षा” को “बाहरी आक्रमण से खतरा” घोषित किया गया था।दूसरा उदाहरण 3 दिसंबर 1971 से 21 मार्च 1972 के बीच था, जिसे मूल रूप से भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान घोषित किया गया था। बाद में इसे 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 के बीच तीसरी उद्घोषणा यानि कि इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्रित्व काल में राजनीतिक अस्थिरता की विवादास्पद परिस्थितियों में, जब “आंतरिक अशांति” के आधार पर आपातकाल घोषित किया गया था तब बढ़ा दिया गया था ।
भारत के इतिहास में 25 जून एक महत्वपूर्ण और भयानक तारीख है। सन् 1975 में 25 जून को ही पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ‘इमरजेंसी’ अर्थात आपातकालीन स्थिति की घोषणा की थी, जो भारत के सबसे काले दिनों में से एक थी।
इस इमरजेंसी के दौरान सभी लोकतांत्रिक संस्थान विकृत कर दिए गए थे । सम्पूर्ण भारतवासियों के मौलिक अधिकारों को छीन लिया गया था। पूरे देश पर संकट छा गया था। इंदिरा गांधी जिन्हें ‘ आयरन लेडी ‘ के नाम से भी जाना जाता है  अपने सत्ताकाल में इमरजेंसी लागू कर अपनी शक्तियों का गलत प्रयोग किया था। वह इस इमरजेंसी की आड़ लेकर स्वयं के राजनीतिक जीवन को बचाना चाहती थी।
क्योंकि जब 1971 के आम चुनाव में इंदिरा गांधी सत्ता में आई तो उन्होंने अपनी बेजुबान या गूंगी गुड़िया वाली छवि को सुधारने का काम किया और ‘ आयरन लेडी’ के रूप में स्वयं को उभारा ।लेकिन इस काल के दौरान सन् 1975 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में राजनारायण रायबरेली यूनाइटेड सोशलिस्ट पार्टी के एक उममीदवार ने इंदिरा गांधी के खिलाफ एक याचिका दायर की । जिसमें उन्होंने इंदिरा गांधी द्वारा चुनाव प्रचार में किए गए अवैध कार्यों की एक सूची पेश की। इस सूची में अवैध शराब , घुस देने और वायु सेना के विमानों का दुरुपयोग करने के आरोप शामिल थे। इस याचिका पर उच्च न्यायालय के न्यामूर्ति न्यामूर्ति जगनमोहन लाल सिन्हा ने फैसला सुनाया था और इंदिरा गांधी को दोषी पाया गया था।

न्यायालय ने इंदिरा गांधी को अवैध रूप से रायबरेली कि सीट जीतने का दोषी पाया गया । इस पर इंदिरा गांधी द्वारा जीते गए चुनाव को रद्द कर दिया गया और उन्हें आने वाले 6 वर्षों तक चुनाव लड़ने से रोक दिया गया ।इस फैसले के तुरंत बाद इंदिरा गांधी ने सभी नेताओं के साथ एक बैठक कि और उन सभी से इस मामले के संबंध में सलाह ली ।
इंदिरा गांधी ने उस बैठक के बाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का फैसला किया । इसके बाद 24 जून 1975 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह उच्च न्यायालय के फैसले पर पूरी तरह रोक नहीं लगाएंगे और उन्होने इंदिरा गांधी को प्रधनमन्त्री बने रहने की इजाजत दे दी । मगर अंतिम निर्णय आने तक उन्हें एक सांसद के रूप में मतदान करने से रोक दिया गया ।

इसके बाद ही इंदिरा गांधी ने उस समय के राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद को 25 जून 1975 की आधी रात को ही अपातकालीन घोषणा पर हस्ताक्षर करने को कहा। उन्होंने राष्ट्रपति ने कहा कि अदालत के फैसले से नागरिकों में अशांति फैल गई है और नागरिक अशांति कानून और व्यवस्था दोनों के लिए खतरा थी।
घोषणा के तुरंत बाद राज्य की कानून और व्यवस्था काम करने लगी । इसके साथ ही जयप्रकाश नारायण , वाजपे , लालकृष्ण आडवाणी मोरारजी देसाई और अनेक विपक्षी नेताओ को गोलबंद कर दिया गया ताकि आयरन लेडी के फैसले के खिलाफ कोई आवाज़ न उठा सके।
भारत के इतिहास के काले अध्यायों की नींव 25 और 26 जून की मध्यरात्रि को निर्धारित की गई थी।
एक रेडियो प्रसारण में, इंदिरा गांधी ने देश के लोगों को बताया कि सरकार के खिलाफ एक गहरी साजिश रची गई थी, यही वजह है कि आपातकाल लगाया गया था।बाद में इंदिरा गांधी के शासन के दौरान आतंक के शासनकाल के बाद: प्रेस की स्वतंत्रता को छीन लिया गया, कई वरिष्ठ पत्रकारों को जेल भेज दिया गया।ताकि जनता को इस आपातकाल की घोषणा की असली वजह न पता लग सके। आपातकाल का विरोध करने वाले हर व्यक्ति को जेल में डाल दिया गया। लगभग 11 लाख लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। यह सब केवल सत्ता में रहने के लिए किया गया।

इस तरह हम देख सकते हैं कि सत्ता का लालच और शासन की भूख किस तरह एक फलते फूलते देश को तबाह कर सकती है और इंदिरा गांधी ने ऐसा ही किया। केवल सत्ता के लालच में पड़कर उन्होंने न जाने कितनी ही जिंदगीयां मौत के हवाले कर दी। देश का भविष्य दांव पर लगा दिया। प्रेस की स्वतंत्रता छीन कर उन्होंने संपूर्ण देश को न जाने कितने वर्ष पीछे धकेल दिया।

1975 में आपातकाल अर्थात भारत का अंधकार काल 21 महीने तक चला, 21 मार्च 1977 को समाप्त हुआ।

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