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दुनिया वार्म हो रही है इसीलिए मौसम कोल्ड हो रहा है

छोटी अवधि की एकाएक आई शीत लहर कोल्ड स्नेप कहते हैं। हैरत की बात ये है कि ये कोल्ड स्नैप्स उसी समय हो रहे हैं जब मौसम संबंधी एजेंसियां बताती हैं कि 2020 अब तक के सबसे गर्म सालों में था।

पिछला साल भले ही मानव इतिहास का सबसे गर्म साल रहा हो, लेकिन फ़िलहाल कई देशों में, 2021 की शुरुआत काफ़ी सर्द रही है। जहाँ पड़ोसी देश चीन में, बीजिंग ने तो 20 वर्षों में सबसे कम तापमान दर्ज किया, तो स्पेन में, मैड्रिड ने हाल ही में, 1971 के बाद से सबसे तीव्र, एक भारी स्नोस्टॉर्म का अनुभव किया। आखिर ऐसा क्यों हो रहा है कि एक तरफ़ दुनिया इतनी गर्म हो रही है तो दूसरी तरफ़ अचानक इतनी सर्दी भी पड़ रही है?

आपको पढ़ कर अटपटा लग सकता है लेकिन असलियत ये है कि अब सर्दियाँ अचानक इतनी भीषण इसलिए हो रही हैं क्योंकि दुनिया गर्म हो रही है।

अंग्रेजी में इस छोटी अवधि की एकाएक आई शीत लहर कोल्ड स्नेप कहते हैं। हैरत की बात ये है कि ये कोल्ड स्नैप्स उसी समय हो रहे हैं जब मौसम संबंधी एजेंसियां बताती हैं कि 2020 अब तक के सबसे गर्म सालों में था। यह घोषणा एक ग्लोबल वार्मिंग प्रवृत्ति की पुष्टि करती है, जो वर्ष 2015-2020 के अनुरूप रिकॉर्ड पर छह सबसे गर्म वर्षों के साथ है। लंबे समय से ठंडे दौर कम हो रहें हैं और ग्रह के गर्म होने के साथ सर्दियां हलकी होने का अनुमान है।

लेकिन पिछले कुछ वर्षों में, उत्तरी गोलार्ध के कुछ हिस्सों में सर्दियों के अधिक गंभीर मौसम देखे गए हैं। दुनिया के गर्म होती हुए ये अत्यधिक ठंडे दौर बस इस तथ्य को प्रतिबिंबित कर सकतें हैं कि मौसम परिवर्तनशील है, और ऐसी घटनाएं यादृच्छिक मौके के रूप में होती हैं।

हालांकि, कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि मानव-जनित ग्लोबल वार्मिंग (और विशेष रूप से आर्कटिक की वार्मिंग) वास्तव में मध्य अक्षांश क्षेत्रों में ठंडी सर्दियों के पीछे एक कारक हो सकती है – उष्णकटिबंधीय और आर्कटिक के बीच के क्षेत्रों में – जैसे उत्तरी अमेरिका, यूरोप और एशिया के कुछ हिस्सों।

कई अध्ययनों ने सीधे सीधे उत्तरी गोलार्ध के कुछ हिस्सों में विशेष ठंड के स्नैप्स को आर्कटिक में वार्मिंग के साथ जोड़ा है:

  • नेचर जियोसाइंस में 2014 के एक अध्ययन में निष्कर्ष निकाला गया है कि आर्कटिक में, बैरेंट्स-कारा सागर में समुद्री बर्फ की कमी से मध्य यूरेशिया में गंभीर सर्दियों की संभावना दोगुनी से अधिक हो गई है।
  • नेचर जियोसाइंस में 2015 के एक अध्ययन में बैरेंट्स-कारा सागर में उच्च तापमान और फिर पूर्वी साइबेरियन-चकची सागर क्षेत्रों (दोनों आर्कटिक में है) और पूर्वी एशिया और उत्तरी अमेरिका में गंभीर सर्दियों के बीच संबंध पाया गया।
  • नेचर कम्युनिकेशंस में 2018 के एक अध्ययन में नोट किया गया है कि जैसे-जैसे आर्कटिक तापमान में वृद्धि हुई, मध्य-अक्षांशों में, विशेष रूप से पूर्वी अमेरिका में, गंभीर सर्दियों की आवृत्ति में भी वृद्धि हुई।
  • अमेरिकी मौसम विज्ञान सोसाइटी द्वारा 2018 के अध्ययन में आर्कटिक में ध्रुवीय वोर्टेक्स (चक्रवात) में परिवर्तन (नीचे देखें) के साथ यूरेशिया में ठंड में बढ़ती सर्दी की  प्रवृत्तियों को जोड़ा है।

संभव तंत्र

आर्कटिक की गर्मी और मध्य अक्षांशों में ठंडे मौसम के बीच संबंध के बावजूद, इस बात पर वैज्ञानिक बहस चल रही है कि ये दो घटनाए आखिर कैसे जुड़ी है, अगर यह वास्ता में जुड़ीं हुई हैं।

जेट स्ट्रीम और ध्रुवीय वोर्टेक्स (चक्रवात) में परिवर्तन सहित कई तंत्र प्रस्तावित किए गए हैं:

जेट स्ट्रीम

जेट स्ट्रीम हवा की एक तेज़ नदी है जो पृथ्वी की सतह के ऊपर, मध्य-अक्षांशों और उच्च ऊँचाइयों को घेरती हुई बहती है। यह ध्रुवों पर ठंडे तापमान और भूमध्य रेखा पर गर्मी के बीच विपरीत द्वारा पैदा होती है। जेट स्ट्रीम के मार्ग में परिवर्तन से गर्म या ठंडी हवा का द्रव्यमान एक स्थान से दूसरे स्थान तक जा सकता है।

जैसे-जैसे आर्कटिक गर्म होता है, जेट स्ट्रीम पर ज़ोर और खिंचाव कम होता है, जिसके परिणामस्वरूप एक कमजोर हवा की धारा एक स्थान पर अटक जाने की संभावना अधिक होती है। यह विशिष्ट स्थानों में अधिक लगातार मौसम की स्थिति पैदा कर सकता है, जो चरम घटनाओं का कारण बन सकती है, जैसे कि हीटवेव, सूखा और ठंड के दौर।

इस 2018 पेपर में जेट स्ट्रीम और आर्कटिक में परिवर्तन कैसे मध्य-अक्षांशों में मौसम के पैटर्न को प्रभावित कर सकते हैं की अधिक गहराई से व्याख्या शामिल है।

ध्रुवीय वोर्टेक्स (चक्रवात)

एक ध्रुवीय वोर्टेक्स (चक्रवात) एक ठंडी हवा के कम दबाव का क्षेत्र है जो ध्रुवीय क्षेत्रों में होता है। ठेठ रूप से ध्रुवीय वोर्टेक्स ठंडी हवा को बोतलबंद रखता है। लेकिन अगर वोर्टेक्स भंग होता है तो आर्कटिक के ऊपर आमतौर पर रहने वाली ठंडी हवा दक्षिण की ओर विस्थापित हो जाती है, जो उत्तरी अमेरिका और यूरेशिया में तापमान गिरने का कारण है।

अवलोकन संबंधी अध्ययन बताते हैं कि आर्कटिक वार्मिंग और समुद्री बर्फ में क्षति, ध्रुवीय वोर्टेक्स को भंग कर सकता है, जिससे उत्तरी अमेरिका और यूरेशिया में कोल्ड स्नैप्स शुरू हो सकते हैं। लेकिन जलवायु मॉडल सिमुलेशन में आर्कटिक हीटिंग ध्रुवीय वोर्टेक्स को भंग करने के लिए अपर्याप्त है – जिससे पता चलता है कि मॉडल या तो अन्य कारकों को अनदेखा कर रहें हैं या महाद्वीपों का ठंडा होना एक अलग तंत्र के माध्यम से होता है।

नेचर क्लाइमेट चेंज में प्रकाशित 2019 के पेपर में आप इस पर अधिक विस्तृत चर्चा पा सकते हैं। ध्रुवीय वोर्टेक्स और ठंड के मौसम के पैटर्न के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप NOAA वेबसाइट पर भी जा सकते हैं।

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Written by Nishant

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