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TPIJSSH के नए अंक का प्रकाशन

द पर्सपेक्टिव इंटरनेशनल जर्नल ऑफ सोशल साइंस एंड ह्यूमनिटीज़’ का प्रकाशन 

सामाजिक विज्ञान और मानविकी के त्रैमासिक जर्नल ‘द पर्सपेक्टिव इंटरनेशनल जर्नल ऑफ सोशल साइंस एंड ह्यूमनिटीज़’ (The Perspective International Journal of Social Science and Humanities-TPIJSSH) का प्रकाशन आरंभ हुआ है। इस द्विभाषी (हिन्दी और अँग्रेजी) ऑनलाइन जर्नल में संरक्षक के रूप में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के पूर्व अध्यक्ष प्रो. सुखदेव थोरात और भारत सरकार के आदिवासी मामलों की समिति के पूर्व सदस्य प्रो. वर्जिनियस खाखा जुड़े हुए हैं। इस लिहाज से यह एक महत्वपूर्ण बौद्धिक शुरुआत है। जर्नल के संपादक महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय, वर्धा के सहायक प्रोफेसर एवं कोलकाता क्षेत्रीय केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार ‘सुमन’ हैं। उप संपादक के रूप में युवा लेखक-अध्येता अनीश कुमार,  नीतिशा खलखो एवं रजनीश कुमार अंबेडकर अपना योगदान दे रहे हैं। संपादक मण्डल एवं सलाहकार मण्डल में देश-विदेश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के प्राध्यापक इस जर्नल से जुड़े हुए हैं। यह जर्नल पूर्व समीक्षित प्रक्रिया पर आधारित है। इसमें शोध पत्र चयन से उस पर पूर्व विभिन्न विषय विशेषज्ञों की राय एवं टिप्पणी ली जाती है। जर्नल के पहले अंक (फरवरी-अप्रैल 2020) में नौ शोध-पत्र और एक समीक्षा आलेख प्रकाशित किए गए हैं। इसमें दलित साहित्य चिंतन से संबंधित दो शोध-पत्र,  आदिवासी विमर्श से जुड़े चार शोध पत्र तथा एक शोध पत्र स्त्री प्रश्नों पर केंद्रित है। मीडिया और किसान जीवन से संबंधित शोध पत्र भी इस अंक में शामिल किया गया है । जर्नल ने अपने पहले अंक से ही शोध के अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध दिखता है। जर्नल के संपादक डॉ. सुनील कुमार ‘सुमन’ अपने संपादकीय में लिखते हैं- “ हमने अपने सफ़र का पहला क़दम बढ़ा दिया है । यह यात्रा अकादमिक व बौद्धिक ज़मीन को समृद्ध बनाने के संकल्प के साथ शुरू हुई है । वैसे तो इस समय हिंदी-अंग्रेज़ी के अनेक जर्नल प्रकाशित हो रहे हैं, परंतु हम उनके बीच लगातार कुछ नवीनता और बेहतरी के लिए प्रयास करेंगे । चूंकि यह सोशल साइंस और ह्यूमनिटिज का जर्नल है, तो अपनी कोशिश रहेगी कि ज्ञान के इन विविध क्षेत्रों-पक्षों से कुछ उत्कृष्ट शोध आलेख हम यहाँ उपलब्ध करा पाएँ । अभी हम खुद को तैयार करने की प्रक्रिया में हैं इसलिए जर्नल का व्यवस्थित व मजबूत स्वरूप आगामी दिनों में देखने को मिलेगा । लेकिन इस बात के लिए हम जरूर आश्वस्त करना चाहेंगे कि गुणवत्ता के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया जाएगा । शोध के अंतरराष्ट्रीय मानकों का यथासंभव पालन सुनिश्चित कराना हमारी ज़िम्मेदारी रहेगी । इसके लिए शोध पत्रों के चयन की अपनी निष्पक्ष, पारदर्शी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को हम हमेशा कायम रखने की कोशिश करेंगे ।”

      सामाजिक विज्ञान और मानविकी के क्षेत्र में यह जर्नल कुछ अलग और गंभीर अकादमिक प्रयास करता हुआ दिखाई देता है। इसके पहले अंक में विदेशों से भी शोध पत्र प्रकाशित किए गए हैं । जर्नल के संपादक डॉ सुनील कुमार ‘सुमन’ का कहना है कि ‘‘हमारा ध्येय सामाजिक विज्ञान और मानविकी के क्षेत्र में गंभीर शोध अध्ययन व लेखन को सामने लाना है। जर्नल भविष्य में महत्वपूर्ण व ज्वलंत विषयों पर विशेषांक भी प्रकाशित करेगा। अधिक जानकारी के लिए जर्नल के वेबसाइट : www.tpijssh.com पर विजिट किया जा सकता है । इस जर्नल को देश-विदेश के विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर index भी किया गया है ।’’ जर्नल का दूसरा अंक (मई-जुलाई 2020) भी प्रकाशित हो गया है। इस जर्नल का अकादमिक व बौद्धिक जगत में काफी स्वागत किया जा रहा है।

–     आकांक्षा कुरील, वर्धा की रिपोर्ट । 

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