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मुस्लिम नेताओं और एंटी सीएए प्रदर्शनकारियों का लगातार उत्पीड़न – फ्रेटर्निटी मूवमेंट एचसीयू द्वारा आयोजित ऑनलाइन विद्रोह

लॉकडॉउन में पुलिस द्वारा अनेक मुस्लिम नेताओं , विद्यार्थियों , प्रदरशनकारियों और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करने की खबरें हमें मिलती रहती हैं। ऐसा लगता है मानो सरकार लॉकडॉउन की आड में इन सभी की आवाज़ को दबाना चाहती है। इसी के विरोध में 11 जुलाई को, हैदराबाद विश्वविद्यालय के फ्रेटर्निटी मूवमेंट ने मुस्लिम नेताओं और एंटी सीएए प्रदर्शनकारियों के उत्पीड़न के खिलाफ एक ऑनलाइन विरोध वेबिनार का आयोजन किया । यह ऑनलाइन विरोध, जो जूम ऐप के माध्यम से आयोजित किया गया था। साथ ही यह उनके फेसबुक पेज पर लाइव आयोजित किया गया और यू ट्यूब पर भी इस पूरे सत्र की वीडियो मौजूद है।

उन्होंने अपने इस ऑनलाइन विरोध प्रदर्शन के लिए 3 वक्ताओं को आमंत्रित किया था।पहले वक्ता वर्दाह बेग, जो एएमयू में लॉ कि विद्यार्थी और एंटी सीएए कार्यकर्ता हैं,  दूसरे फसीह अहमद, जो हैदराबाद विश्वविद्यालय में अनुसंधान विद्वान और छात्र नेता हैं और उनके तीसरे वक्ता हेबा अहमद, जो जेएनयू में अनुसंधान विद्वान और छात्र नेता हैं ।

पहकी वक्ता वर्दाह बेग थी। उन्होंने इस मुद्दे पर बोलने में सक्षम होने के अवसर के लिए धन्यवाद दिया, जो अब तक सिर्फ ट्विटर और व्हाट्सएप मैसेज के रूप में किया गया था। एएमयू छात्र शारजील उस्मानी की हाल ही में हुई गिरफ्तारी के बारे में बात करते हुए, उन्होंने कहा कि राज्य और पुलिस मुस्लिम छात्रों का अपराधीकरण करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने इस विषय में बात करने की जरूरत पर जोर डाला कि ये छात्र वास्तव में कौन हैं? और वे राज्य के लिए ऐसा खतरा कैसे बन गए कि उन्हें गिरफ्तार करने के लिए पुलिस को अवैध तरीकों का इस्तेमाल करना पड़ा?

बीच में शरजील उस्मानी के स्वभाव के बारे में बात करते हुए, उन्होंने कहा कि वह हर उस चीज़ के बारे में आवाज़ उठाते थे जो कि अन्यायपूर्ण थी। उन्होंने हमेशा कैंपस में सक्रियता बनाए रखी। वह एक ऐसे व्यक्ति हैं जो हमेशा अपने समुदाय के बारे में बहुत चिंतित रहे हैं। शरजील उस्मानी की अन्यायपूर्ण गिरफ्तारी के बारे में बताते हुए, उन्होंने कहा कि 4-5 लोग, जिन्होंने दावा किया कि वे यूपी पुलिस की क्राइम ब्रांच से थे , साधारण वेश में आए और उसे गिरफ्तार कर लिया। लेकिन खुद को पुलिस साबित करने के लिए उनके पास कोई वर्दी या कोई पहचान पत्र नहीं था। उन्होंने शरजील को उनकी पुस्तकों और लैपटॉप के साथ उनके घर से उठाया। किसी व्यक्ति के अधिकारों के उल्लंघन के बारे में वह बताती हैं कि किस तरह एक विद्यार्थी के लैपटॉप और उनकी किताबों को उन्हीं के खिलाफ सबूत के तौर पर तोड़ मरोड़ कर पेश किया जा सकता है। वह बताती है कि किस तरह यह एक आम इंसान के अधिकारों का हनन है जो उसे संविधान के अनुच्छेद 22 में प्रदान किए गए हैं । क्योंकि गिरफ्तारी के समय शरजील को उनकी गिरफ्तारी से सम्बन्धित कोई भी जानकारी नहीं दी गई । इसके साथ ही उनके परिवार वालों को भी इसकी जानकारी नहीं दी गई कि उनको कहां लेकर जा रहे हैं। इन सब में वह यह भी उल्लेख करती है कि मजिस्ट्रेट की ओर से पहली बार उसकी गिरफ्तारी पर हस्ताक्षर करना गलत था।

शारजील उस्मानी जैसे मुस्लिम युवा नेता इतने कट्टरपंथी हैं कि कई लोग उनसे अलग होने की कोशिश करते हैं। वह इस विषय को लेकर स्पष्ट थे कि उन्हें जीवन में क्या चाहिए। वह  यह भी बताती हैं कि वह राज्य सरकार के लिए एक टारगेट इसलिए भी था क्योंकि वह एक मुसलमान है जो इस बात को लेकर स्पष्ट है कि उसे क्या करना है। वह मुस्लिम है जो सोचता है। यूपी की स्थिति के बारे में बात करते हुए, वह कहती है कि यूपी इस समय पूरी तरह से कानून विहीन है और वहां पूरी तरह से गुंडाराज छाया हुआ है। यह बात किसी से छिपी नहीं है। वह इस बात को भी अपनी चर्चा में जोड़ती हैं कि इन सब कोशिशों को अंजाम देकर ये लोग वहां हिंदू राष्ट्र जो पहले से ही वहां स्थापित है , उसको और अधिक मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।  वे स्पष्ट रूप से अपने इस एजेंडे को अंजाम दे रहे हैं।

इसके बाद दूसरे वक्ता फसीह अहमद थे। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि पिछले 25 सालों राजनीतिक माहौल में कितना बदलाव आया है। आजकल किसी भी मुस्लिम को उनके घरों से बिना किसी कारण के उठाया जा सकता है। साथ ही उनकी गिरफ्तारी का कोई पुख्ता कारण मीडिया या जनता को नहीं बताया जाता। उन्होंने सीएए के विरोध प्रदर्शनों के दौरान मुसलमानों के महत्व पर जोर दिया और जब मुस्लिम नागरिकों के अधिकारों के लिए लड़ने के लिए आगे आए तो हर कोई इसमें शामिल हुआ। उन्होंने इस बात पर भी ध्यान केंद्रित किया कि तब्लीगी जमात मामले के बाद मुसलमानों को कैसे निशाना बनाया गया और उन्हें लताड़ा गया।वह इस बात पर भी जोर देते हैं कि किस तरह यह समाज शुरुआत से ही मुस्लिमों का बहिष्कार करने में पीछे नहीं हटता। कदम कदम पर मुस्लिम समुदाय के लोगों को जातिगत भेदभाव और बहिष्कार का सामना करना पड़ता है।

इस ऑनलाइन विरोध में तीसरी वक्ता, हेबा अहमद थी उन्होंने कहा कि यह ऑनलाइन विरोध केवल विरोध प्रदर्शनों का एक सिलसिला है ,जो जमीन स्तर पर किया गया था। उसने उल्लेख किया कि नजीब अहमद के लिए आयोजित विरोध प्रदर्शन पहली बार था जब लोग मुसलमानों को निशाना बनाने की बात कर रहे थे, जो स्पष्ट रूप से कई लोगों द्वारा पसंद नहीं किया गया था। छात्र प्रदर्शनकारियों पर पहचान की राजनीति करने का आरोप लगाया गया था। वह हालांकि असहमत हैं। हेबा अहमद के अनुसार, इन विरोधों के साथ, अभी जो राजनीति मुसलमान कर रहे हैं, वह विपक्ष की राजनीति है। यह सब करने का उनका मकसद यह बताना है कि वे देश के कुलीनों के सामने नहीं झुकेंगे।

उन्होंने विपक्ष के रूप में मुस्लिमों की अपार भागीदारी के महत्व पर भी जोर दिया और कहा कि वे अत्याचार के खिलाफ कैसे आगे बढ़ रहे हैं। वह जोर देकर कहती हैं कि हमें तथ्यों का दस्तावेजीकरण करते रहना होगा और प्रतिरोध जारी रखना होगा।

ऑनलाइन विरोध प्रदर्शन खुर्रम सिद्दीकी ने चर्चा में भाग लेने वाले प्रतिभागियों के कुछ सवाल वक्ताओं के सामने रखे और वक्ताओं ने उन सवालों के जवाब दिए। फिर अंत में मध्यस्थ खुर्रम सिद्दीक़ी ने सभी वक्ताओं और प्रतिभागियों को इस विरोध का हिस्सा बनने के लिए धन्यवाद दिया।

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