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यूपी : कानून प्रशासन की टूटी रीढ़ की हड्डी और मीडिया की कटी जबान

एक सुसाइड पर पूरे देश में बवाल हो जाता है और बलात्कार पर घर-परिवार और सरकार की बदनामी के डर से चुप बैठ जाते हो क्यों? आवाज़ को बुलंद करना ज़रूरी है आपके लिए-आपके बच्चों के लिए।

ये तुमने अच्छा किया की उसको जला दिया, बिना उसके परिवार की सहमति के, उनको घर में बंद करके। अच्छा किया तुमने क्योंकि तुम जानते थे के तुम उसको इंसाफ नहीं दे पाओगे इसलिए उसको आग के हवाले कर दिया। जिसके आदेश पर तुमने ऐसा किया वो संतान नही रखता, लेकिन तुम तो औलाद वाले थे! समझते होगे उस दर्द-पीड़ा को जो मनीषा का परिवार सहन कर रहा है!

वैसे इस देश की जनता के साथ ऐसा होना स्वाभाविक है क्योंकि इन्होंने जिन लोगों को सत्ता सौपी उनमें इससे भी ज़्यादा ज़हर है और ज़हरीले लोगों के राज में रामराज्य की कल्पना करना एक अपराध है। हाथरस घटना इकलौती नहीं है यह ऐसा दाग है की न जाने कल किसके दामन या परिवार पर लग जाये। ऐसी घटनाएं लगातार हो रही है क्योंकि इन घटनाओं की जड़ नफरत है और एक पक्ष के खिलाफ नफरत के ज़हर में घुलकर तुमने उन लोगों को सत्ता सौप दी। क्या तुम्हें अब डर नहीं लगता? ऐसी सोच और ऐसे फैसलों से जो आजकल लिए जा रहे हैं।

राजनीतिक फायदों के लिए किसी की आत्महत्या पर भी पूरे देश में हल्ला होता है और न जाने कितनी समस्याओं या कहा जाए परेशान लोगों की आवाजों को दबा दिया जाता है, क्यों? एक सुसाइड पर पूरे देश में बवाल हो जाता है और बलात्कार पर घर-परिवार और सरकार की बदनामी के डर से चुप बैठ जाते हो क्यों? आवाज़ को बुलंद करना ज़रूरी है आपके लिए-आपके बच्चों के लिए।

हाथरस में जिस मनीषा की ज़ुबान को काट दिया गया और रीढ़ की हड्डी को तोड़ दिया गया, क्या यह जघन्य अपराध नही है? वो दलित है और अपराधी ऊंची जाति के है। ये सब क्या तमाशा है और इस पर समाज को बांटा जा रहा है और समाज बंट रहा है। ऐसा नही होना चाहिए अपराधियों को सज़ा और कठोरतम सज़ा मिलनी चाहिए। जिससे कि समाज में इस अपराध की कड़ी सजा की परिभाषा को सुनिश्चित किया जा सके। वरना ये सोचकर ही आप उठ जाइये कि राज्य में रीढ़ की हड्डी मनीषा की नहीं टूटी प्रदेश की कानून व्यवस्था की टूटी है और ज़ुबान उसकी नही बल्कि मीडिया की काट दी गयी है। जिस पर खामोशी छाई हुई है। लेकिन हमें बोलना चाहिए। आपको अगर फिक्र है, अपनी बेटियों की तो आवाज़ बुलंद करो और हां यह जान लो के किसान पहले से सड़क पर है और तुम्हे उसका साथ भी देना है और उसका साथ लेना भी है। इसलिए दोनों हाथों को बुलंद करो और एक से किसान के लिए और दूसरे से मनीषा के लिए इंसाफ की मांग करो।

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