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वेबिनार : शिक्षा की बदलती गतिशीलता पर यू कैन फाउंडेशन द्वारा आयोजित श्रृंखला का पांचवा चरण

25 जुलाई, 2020 को, यू कैन फ़ाउंडेशन ने अपनी वेबिनार की चल रही श्रृंखला ‘शिक्षा क्षेत्र की बदलती गतिशीलता’ की पांचवीं कड़ी की मेजबानी की ।

25 जुलाई, 2020 को, यू कैन फ़ाउंडेशन ने अपनी वेबिनार की चल रही श्रृंखला ‘शिक्षा क्षेत्र की बदलती गतिशीलता’ की पांचवीं कड़ी की मेजबानी की । इस सप्ताह की वेबिनार में 4 पैनलिस्ट, सबीना केशवानी, एपीजे स्कूल (मुंबई) की प्रिंसिपल, श्री अनिल कुलमार, डीपीएस फरीदाबाद के प्रिंसिपल, डॉ. प्रतिमा, पीजीडीएम की डीन, जेआईएमएस और सुश्री इंदु पुंज, स्टोरीज मैटर की संस्थापक, थे।

सत्र के लिए मध्यस्थ यू कैन फाउंडेशन के संस्थापक श्री मोनिस शम्सी थे। सभी पैनलिस्टों के आने के बाद, मध्यस्थ के साथ चर्चा शुरू हुई और सभी पैनलिस्टों से उनके जीवन में शिक्षा की भूमिका के बारे में पूछा गया। साधारण रूप से, प्रत्येक पैनलिस्ट की एक सामान्य टिप्पणी थी कि उन्होंने शिक्षा को करियर के रूप में चुना, क्योंकि वे क्षेत्र के बारे में बहुत भावुक थे। उनके जीवन का आरंभ से ही यही लक्ष्य था, वे अपनी पसंद से ही इस क्षेत्र में आए। एक शिक्षक के रूप में सीखने के महत्व पर भी उनके विचार समान थे।

अगले सवाल पर चलते हुए, मॉडरेटर ने सुश्री सबीना से कक्षाओं में चिंतनशील अनुभव की कमी के बारे में पूछा। सबीना जी ने कहा कि उन्होंने हमेशा बच्चों के समग्र (collaborative) विकास को सुनिश्चित किया है। उन्होंने यह भी बताया कि हर बार, पाठ्यक्रम कोई मायने नहीं रखता है, यह सब शिक्षक पर निर्भर करता है कि शिक्षक किस तरह अपनी कक्षा को संभालते हैं। उन्हें स्कूलों में क्षेत्र-आधारित सीखने और सहयोगी सीखने की शुरुआत करने की आवश्यकता है। साथ ही शिक्षक के अंदर सिखाने का जज्बा भी मायने रखता है। उन्होंने बताया की सिखाने के लिए जरूरी नहीं की एक निश्चित बिल्डिंग हो या एक क्लासरूम होना जरुरी हो, आज के समय में यह बात साबित हो चुकी है। क्योंकि आज शिक्षा पूरी तरह से टेक्नोलॉजी के माध्यम से ही दी जा रही है।

मध्यस्थ ने फिर श्रीमती इंदू से बच्चों में समावेशिता और सहानुभूति की कमी के बारे में पूछा, जिसके जवाब में उन्होंने जवाब दिया कि बच्चों को सहानुभूति के बारे में जानकारी देने का एकमात्र तरीका उनको दैनिक जीवन से अनुभव दिलाना है। यह कोई ऐसा विषय नहीं है जिसे गैजेट्स के साथ सिखाया जा सकता है। श्री अनिल ने उन मूल्यों के साथ रहने के एक महत्वपूर्ण बिंदु पर प्रकाश डाला जो हम सीख रहे हैं। उनके अनुसार शिक्षा क्षेत्र का सबसे महत्वपूर्ण बिंदू शिक्षकों का विद्यार्थियों के प्रति सच्चा होना है। यदि शिक्षक सच्चा नहीं है, तो वह बच्चों को भी सचाई का पाठ नहीं पढ़ा सकता है। इसके साथ ही शिक्षक के अंदर चीजों को स्वीकर करने की भी क्षमता होनी चाहिए।

जब वक्ताओं स्कूलों में किए जा सकने वाले सुधारों के बारे में पूछा गया। तब प्रतिमा जी ने इसका जवाब देते हुए बताया कि, उनके अनुसार जब बच्चे कॉलेज में आते हैं, तो उनके अंदर निर्णय लेने की शक्ति, रचनात्मकता और खुद को व्यक्त करने की क्षमता में कमी होती है। उनके स्कूली जीवन के दौरान, शिक्षा प्रणाली, स्कूल प्रबंधन और माता-पिता द्वारा उनके लिए सब पहले ही निश्चित कर दिया जाता है है। उन्हें अपने निर्णय लेने का मौका नहीं मिलता है। उसी के बारे में बात करते हुए, सुश्री इंदु ने कहा कि बच्चे को जीवन में क्या करना है इसका भार बच्चों के कंधे पर होना चाहिए। उन्हें इससे बचना नहीं बल्कि इसमें खुलकर भाग लेना चाहिए और स्वयं अपनी समस्याओं का हल खोजने की कोशिश करनी चाहिए।

अगले सवाल के पूछे जाने पर कि स्कूल छात्रों के बीच प्रतिस्पर्धात्मक माहौल को कैसे संतुलित करते हैं, श्री अनिल ने जोर देकर कहा कि प्रतिस्पर्धा का मुद्दा इसलिए उठता है क्योंकि छात्र चीजों को उसी प्रकार स्वीकार नहीं करते जिस प्रकार वह उनके पास आती हैं। यहीं पर एक शिक्षक की भूमिका सामने आती है। सहयोगी शिक्षण पर जोर दिया जाना चाहिए। उन्होंने प्रतिस्पर्धा की बजाय सहयोगीता की भावना को ज्यादा महत्वपूर्ण बताया।

अंत में सत्र का हिस्सा बनने के लिए सभी पैनलिस्ट को धन्यवाद देते हुए सत्र का समापन हुआ।

 यू कैन फाउंडेशन, 2013 में स्थापित, एक एनजीओ है, जिसे युवाओं को विकास क्षेत्र में स्वयं सेवा और सीखने के अवसर प्रदान करके उन्हें सशक्त बनाने की दृष्टि से शुरू किया गया था।

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